siphalis-problem

सुजाक, सिफलिस आतशक या उपदंश का घरेलु उपचार
वैद हरदास, बठिन्डा (पंजाब)
परिचय

सुजाक और आतशक (उपदंश) यौन रोगों की बहुत ही घिनौनी बीमारियों में गिनी जाती हैं। यह रोग स्त्री और पुरुष दोनों को हो सकता है। मूत्रकच्छ,सुजाक,पूयमेह, अथवा गोनारिया एक ही रोग के अलग अलग नाम हैं ।

कारण

सुजाक या उपदंश रोग स्त्री और पुरुषों के गलत तरह के शारीरिक संबंधों के कारण होने वाले रोग है। जो लोग अपनी पत्नियों को छोड़कर गलत तरह की स्त्रियों या वेश्याओं आदि के साथ संबंध बनाते हैं उन्हें अक्सर यह रोग अपने चंगुल में ले लेता है। इसी तरह से यह रोग स्त्रियों पर भी लागू होता है जो स्त्रियां पराएं पुरुषों के साथ शारीरिक संबंध बनाती हैं उन्हें भी यह रोग लग जाता है।

सिफलिस (गर्मी, आतशक या उपदंश)

सिफलिस सबसे पुराने समय का यौन रोग है। यह पुर्तुगीजों के साथ भारत में पहुँचा, इसीलिये उसे फिरंगरोग भी कहते है यह बीमारी एक स्प्रिंग जैसे कीटाणु स्पायरोकीट्स से होती है। सिफलिस में शुरुआती अवस्था में होने वाले घाव को शैंकर कहते हैं। यह एक दर्द रहित और स्थायी घाव होता है। शैंकर जनन अंगों या मुँह तक में हो जाता है। यह स्थान इस पर निर्भर करता है कि यौन सम्बन्ध कैसा रहा है। जनन अंगीय या मुखीय। इसमें क्योंकि दर्द नहीं होता इसलिए योनि के अन्दर का घाव ढूँढ पाना मुश्किल होता है। इसीलिये महिलाएँ अक्सर सिफलिस के बारे में बताती भी नहीं हैं।

उपदंश रोग के लक्षण

गलत तरह के शारीरिक संबंधों के कारण होने वाले उपदंश रोग में रोगी व्यक्ति के जननांगों पर जख्म सा बन जाता है। अगर इस रोग के होने पर लापरवाही बरती जाती है तो यह जख्म रोगी के पूरे शरीर में फैल जाते हैं। इस रोग में रोगी के नाक की हड्डी और लिंग गल जाती है। इसके अलावा इस रोग में रोगी व्यक्ति के जोड़ों में दर्द रहने लगता है, स्त्री को बार-बार गर्भपात होने लगता है या बच्चा पैदा होकर मर जाता है या विकलांग पैदा होता है।

जानकारी

उपदंश रोग के बारे में एक बात याद रखना जरूरी है कि यह रोग कई पीढिय़ों तक अपना असर दिखाता है। इस रोग का इलाज करवाते समय जब तक डाक्टर न कहे या पूरी तरह रोग के ठीक होने की तसल्ली न हो जाए तब तक इलाज करवाना बंद नहीं करना चाहिए क्योंकि अगर इस रोग का विष शरीर में हल्का सा भी रह जाता है तो कुछ समय के बाद यह रोग फिर से पैदा हो जाता है। इसके लिए चिकित्सक द्वारा इलाज समाप्त करने के बाद एकबार खून की जांच करवाकर रोग की समाप्ति की तसल्ली कर लेनी चाहिए।
सिफलिस रोग का उपचार
धनीया 20 ग्राम
आँवला 20 ग्राम
शीतल चीनी 40 ग्राम
सफेद चन्दन 20 ग्राम
बुरादा
गुलाब फूल 20 ग्राम
गोखरू 20 ग्राम
शुद्ध गंधक 20 ग्राम
मंजीष्ठ 20 ग्राम
इन सबको बरीक पीस कर मिला लें और दिन मे तीन बार 10-15 ग्राम जल के साथ ले। साथ मे उशीरासव 3-4 चम्मच तीन बार और चन्द्रप्रभा वटी 2-2 गोली तीन बार 2 माह तक लेने से यह रोग ठीक हो जाता है।
अगर गुप्तअंगो पर कोई घाव आदि हो तो नीम का तेल और फिटकरी लगाने से ठीक हो जाता है,।

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