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घरेलू उपचार के अन्तेर्गत विभिन्न फोर्मुले सोशल मीडिया से लिए गये है चिकित्सा संसार प्रबंधन इसके किसी भी प्रभाव या दुष्प्रभाव के लिए जिम्मेदार नहीं है

घरेलू उपचार  |  बालो की समस्या का उपचार  |  हार्टअटैक या लकवा का इलाज  |  गर्म पानी के फायदे

अतिउपयोगी 29 घरेलू नुस्खेे…!!*

🏽 1. तेज सिरर्दर्द से छुटकारा पाने के लिए सेब को छिल कर बारीक काटें। उसमें थोड़ा सा नमक मिलाकर सुबह खाली पेट खाएं।

🏽 2. (Periods) में दर्द से छुटकारा पाना के लिए ठंडे पानी में दो-तीन नींबू निचोड़ कर पिये।

🏽 3. शरीर पर कहीं जल गया हो, तेज धूप से त्वचा झुलस गई हो, त्वचा पर झुर्रियां हों या कोई त्वचा रोग हो तो कच्चे आलू का रस निकालकर लगाने से फायदा होता हैं।

🏽 4. मक्खन में थोड़ा सा केसर मिलाकर रोजाना लगाने से काले होंठ भी गुलाबी होने लगते हैं।

🏽 5. मुंह की बदबू से परेशान हों तो दालचीनी का टुकड़ा मुंह में रखें।
मुंह की बदबू तुरंत दूर हो जाती हैं।

🏽 6. बहती नाक से परेशान हों तो युकेलिप्टस(सफेदा) का तेल रूमाल में डालकर सूंघे। आराम मिलेगा।

🏽 7. कुछ दिनों तक नहाने से पहले रोजाना सिर में प्याज का पेस्ट लगाएं।
बाल सफेद से काले होने लगेंगे।

🏽 8. चाय पत्ती के उबले पानी से बाल धोएं, इससे बाल कम गिरेंगे।

🏽 9. बैंगन के भरते में शहद मिलाकर खाने से अनिद्रा रोग का नाश होता है।
ऐसा शाम को भोजन में भरता बनाते समय करें।

🏽 10. संतरे के रस में थोड़ा सा शहद मिलाकर दिन में तीन बार एक-एक कप पीने से गर्भवती की दस्त की शिकायत दूर हो जाती हैं।

🏽 11. गले में खराश होने पर सुबह-सुबह सौंफ चबाने से बंद गला खुल जाता हैं।

🏽 12. सवेरे भूखे पेट तीन चार अखरोट की गिरियां निकालकर कुछ दिन खाने मात्र से ही घुटनों का दर्द समाप्त हो जाता हैं।

🏽 13. ताजा हरा धनिया मसलकर सूंघने से छींके आना बंद हो जाती हैं।

🏽 14. प्याज का रस लगाने से मस्सो के छोटे-छोटे टुकड़े होकर जड़ से गिर जाते हैं।

🏽 15. प्याज के रस में नींबू का रस मिलाकर पीने से उल्टियां आना तत्काल बंद हो जाती हैं।

🏽 16. गैस की तकलीफ से तुरंत राहत पाने के लिए लहसुन की 2 कली छीलकर 2 चम्मच शुद्ध घी के साथ चबाकर खाएं फौरन आराम होगा।

🏽 17. मसालेदार खाना खाएं मसालेदार खाना आपकी बंद नाक को तुरंत ही खोल देगा।

🏽 18. आलू का छिलका आपकी त्वचा पर ब्लीच की तरह काम करता है। इसे लगाने से आपकी काली पड़ी त्वचा का रंग सुधरता है।
इसलिए आज के बाद आलू के छिलके को फेके नहीं बल्कि उनका इस्तेमाल करें।

🏽 19. यदि आपको अकसर मुंह में छाले होने की शिकायत रहती है तो रोज़ाना खाना खाने के बाद गुड को चूसना ना भूलें। ऐसा करने छाले आपसे बहुत दूर रहेंगे।

🏽 20. पतली छाछ में चुटकी भर सोडा डालकर पीने से पेशाब की जलन दूर होती ह

🏽 21. प्याज और गुड रोज खाने से बालक की ऊंचाई बढती हैं।

🏽 22. रोज गाजर का रस पीने से दमें की बीमारी जड़ से दूर होती हैं।

🏽 23. खजूर गर्म पानी के साथ लेने से कफ दूर होता हैं।

🏽 24. एक चम्म्च समुद्री नमक लें और अपनी खोपड़ी पर लगा लें। इसे अच्छीो तरह से मसाज करें और ऐसा करते समय उंगलियों को गीला कर लें। बाद में शैम्पू लगाकर सिर धो लें। महीने में एक बार ऐसा करने से रूसी नहीं होगी।

🏽 25. अगर आपके नाखून बहुत कड़े हैं तो उन्हे काटने से पहले हल्केग गुनगुने पानी में नमक डालकर, हाथों को भिगोकर रखें। और 10 मिनट बाद उन नाखूनों को काट दें। इससे सारे नाखून आसानी से कट जाएंगे।

🏽 26. शरीर में कहीं गुम चोट लग जाए या नकसीर आए तो बर्फ की सिकाई बहुत फायदेमंद होती हैं।

🏽 27. अगर कोई कीड़ा-मकोड़ा काट ले, तो तुरंत कच्चे आलू का एक पतला टुकड़ा काटकर उस पर नमक लगाकर कीड़े के काटे हुए स्थान पर 5-7 मिनट तक रगड़ें।जलन और दर्द गायब हो जाएगा।

🏽 28. बवासीर से छुटकारा पाने के लिए सुबह खाली पेट 2 आलू-बुखारे खाए

🏽 29. दांत के दर्द से छुटकारा पाने के लिए अदरक का छोटा सा टुकड़ा चबाएं। दर्द तुरंत दूर हो जाएगा….!!

एसिडिटी की समस्या में सुबह की पहली चाय में एक चुटकी सेंधा नमक मिलाने से आराम मिलता है!

गुड़ खाने से 18 फायदे :

1- गुड़ खाने से नहीं होती गैस की दिक्कत नहीं होती है !

2- खाना खाने के बाद अक्सर मीठा खाने का मन करता हैं। इसके लिए सबसे बेहतर हैकि आप गुड़ खाएं।
गुड़ का सेवन करने से आप हेल्दी रह सकते हैं

3 – पाचन क्रिया को सही रखना

4 – गुड़ शरीर का रक्त साफकरता है और मेटाबॉल्जिम ठीक करता है। रोज एक गिलास पानी या दूध के साथ गुड़ का सेवन पेट को ठंडक देता है। इससे गैस की दिक्कत नहीं होती। जिन लोगों को गैस की परेशानी है, वो रोज़ लंच या डिनर के बाद थोड़ा गुड़ ज़रुर खाएं..

5 – गुड़ आयरन का मुख्य स्रोत है। इसलिए यह एनीमिया के मरीज़ों के लिए बहुत फायदेमंद है।खासतौर पर महिलाओं के लिए इसका सेवन बहुत अधिक ज़रुर है.

6 – त्वचा के लिए, गुड़ ब्लड से खराब टॉक्सिन दूर करता है,जिससे त्वचा दमकती है और मुहांसे की समस्या नहीं होती है।

7 – गुड़ की तासीर गर्म है,इसलिए इसका सेवन जुकाम और कफ से आराम दिलाता है। जुकाम के दौरान अगर आप
कच्चा गुड़ नहीं खाना चाहते हैं तो चाय या लड्डू में भी इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।

8 – एनर्जी के लिए –बुहत ज़्यादा थकान और कमजोरी महसूस करने पर गुड़ का सेवन करने से आपका एनर्जी
लेवल बढ़ जाता है। गुड़ जल्दी पच जाता है, इससे शुगर का स्तर भी नहीं बढ़ता.दिनभर काम करने के बाद जब भी आपको थकान हो, तुरंत गुड़ खाएं।

9 – गुड़ शरीर के टेंपरेचर को नियंत्रित रखता है। इसमें एंटी एलर्जिक तत्व हैं,इसलिए दमा के मरीज़ों केलिए इसका काफीफायदेमंद होता है।

10 – जोड़ों के दर्द में आराम–रोज़ गुड़ के एक टुकड़े केसाथ अदरक का सेवन करें,इससे जोड़ों के दर्द की दिक्कत नहीं होगी।

11- गुड़ के साथ पके चावलखाने से बैठा हुआ गला व आवाज खुल जाती है।

12 – गुड़ और काले तिल के लड्डू खानेसे सर्दी में अस्थमा की परेशानी नहीं होती है।

13 – जुकाम जम गया हो, तो गुड़ पिघलाकर उसकी पपड़ी बनाकर खिलाएं।

14 – गुड़ और घी मिलाकर खाने से कान का दर्द ठीक हो जाता है।

15 – भोजन के बाद गुड़ खा ले ने से पेट में गैस नहीं बनती.
16 – पांच ग्राम सौंठ दस ग्राम गुड़ के साथ लेने से पीलिया रोग में लाभ होता है।

17 – गुड़ का हलवा खाने से स्मरण शक्ति बढती है।

18 – पांच ग्राम गुड़ को इतने ही सरसों के तेल में मिलाकर खाने से श्वास रोग से छुटकारा मिलता है।

अनुभूत घरेलू नुस्खे*:——-

फटी एड़ियों के लिए रात में सोने से पहले पेट्रोलियम जैली के साथ नारियल तेल की मालिश करें। सुबह गुनगुने पानी से पैर धो लें।

डालडा घी और थोडा हल्दी पाउडर को मिलाक गर्म करके थोडा ठंडा होने पर ,थोडा पेस्ट बनाकर रात को सोने से पहले फटी एडियो पर लगाने से आराम मिलता है और सुबह उठकर पैर धो ले !

एक गिलास दूध में बिना शकर डाले शहद घोलकर रात को पीने से दुबलापन दूर होकर शरीर सुडौल, पुष्ट व बलशाली बनता है।

मुँह में छाले होने पर नारियल खाना चाहिए। इससे छाले जल्दीन ठीक हो जाते हैं।

सोने से पहले चाय व काफी न पियें इससे मस्तिष्क की शिरायें उत्तेजित हो जाती हैं और गहरी नींद में बाधक होती है।

कान का दर्द सताए तो एक चम्मच तिल के तेल में लौंग डालकर इसे गरम कर लें। कान में इस तेल की चार-पाँच बूँद टपकाने से कान का दर्द मिट जाता है।

सिर दर्द होने पर गुनगुने पानी में अदरक व नीबू का रस व थोड़ा सा नमक मिलाकर पीने से आराम मिलता है।

सरसों के तेल में अजवायन डालकर अच्छी तरह गरम करें। इससे जोड़ों की मालिश करने पर जोड़ों के दर्द में आराम होता है।

मधुमेह – मधुमेह के रोगी जिनके लिए मिठाई, चीनी इत्यादि वर्जित है, सीमित मात्रा में खजूर का इस्तेमाल कर सकते हैं। खजूर में वह अवगुण नहीं है, जो गन्ने वाली चीनी में पाए जाते हैं।

गुलाब के नाम पर न जाने कितनी कविताएं पढ़ी होंगी आपने। गुलाब के रंग-बिरंगे फूल सिर्फ ड्रॉइंगरूम में फूलदान पर ही अच्छे नहीं लगते, बल्कि इसकी पंखुड़ियां भी बड़े काम की हैं। गुलाब जल का इस्तेमाल फेस मास्क में भी होता है और यह खाने को भी लज्जतदार बनाता है। गुलाब विटामिन ए, बी 3, सी, डी और ई से भरपूर है। इसके अलावा इसमें कैल्शियम, जिंक और आयरन की भी मात्र काफी होती है।

तेजी से खून (हीमोग्लोबिन) बढ़ाने के घरेलु उपाय*

शरीर में खून की कमी से बहुत बीमारियां लग सकती हैं। जिस वजह से इंसान कमजोर हो जाता है और उसका शरीर बीमारियों से लड़ नहीं पाता है। इसलिए महिलाओं और पुरूषों को शरीर में खून की मात्रा बढ़ाने के लिए इन आयुर्वेदिक  उपायों को अपनाना चाहिए।
1.  भोजन
आप अपने भोजन में गेहूं, मोठ, मूंग और चने को बोईल करके उसमें नींबू मिलाकर सुबह का नाश्ता लें।
2. काफी और चाय खतरनाक
काफी और चाय का सेवन कम कर दें। एैसा इसलिए क्योंकि ये चीजें शरीर को आयरन लेने से रोकते हैं।
3.ठंडा स्नान
दो बार दिन में ठंडे पानी से नहाए और सुबह नहाने के बाद सूरज की रोशनी में बैठें।
4. तिल और शहद
दो घंटे के लिए 2 चम्मच तिलों को पानी में भिगों लें और बाद में पानी से छानकर इसका पेस्ट बना लें। अब इसमें 1 चम्मच शहद मिलाएं और दिन में दो बार सेवन करें।
5. आम
पके आम के गुदे को मीठे दूध के साथ सेवन करें। एैसा करने से खून तेजी से बढ़ता है।
6.सिंघाड़ा
सिंघाड़ा शरीर में खून और ताकत दोनो को बढ़ाता है। कच्चे सिंघाड़े को खाने से शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर तेजी से बढ़ता है।
7. मूंगफली और गुड़
शरीर में खून की कमी को दूर करने के लिए मूंगफली के दानों को गुड़ के साथ चबा-चबा कर सेवन करें।
8. मुनक्का, अनाज, किशमिश, दालें
मुनक्का, अनाज, किशमिश, दालो का नियमित सेवन करें और रात को सोने से पहले दूध में खजूर डालकर उसको पीएं।
9. फलो का सेवन
अनार, अमरूद, पपीता, चीकू, सेब और नींबू आदि फलो का अधिक से अधिक सेवन करें।
10. टमाटर का रस
एक गिलास टमाटर का रस रोज पीने से भी खून की कमी दूर होती है। इसलिए टमाटर का सूप भी बनाकर आप ले सकते हो।
11. आंवले और जामुन का रस
आंवले का रस और जामुन का रस बराबर मात्रा में मिलाकर सेवन करने से हीमोग्लोबिन का स्तर बढ़ता है।
12. हरी सब्जिया
बथुआ, मटर, सरसों, पालक, हरा धनिया और पुदीना को अपने भोजन में जरूर शामिल करें।
13. फालसा
फालसे का शर्बत या फालसे का सेवन सुबह शाम करने से शरीर में खून की मात्रा जल्दी बढ़ती है।
14. सेब का जूस
सेब का जूस रोज पीएं। चुकंदर के एक गिलास रस में अपने स्वाद के अनुसार शहद मिलाकर इसे रोज पीएं। इस जूस में लौह तत्व ज्यादा होता है।

फ्रीज़ किए गए नींबू के आश्चर्यजनक परिणाम

सबसे पहले नींबू को धोकर फ्रीज़र में रखिए । ८ से १० घंटे बाद वह बर्फ़ जैसा ठंडा तथा कड़ा हो जाएगा । अब उपयोग मे लाने के लिए उसे कद्दूकस कर लें ।
इसे आप जो भी खाएँ उस पर डाल कर इसे खा सकते हैं ।
इससे खाद्य पदार्थ में एक अलग ही टेस्ट आऐगा ।
नीबू के रस में विटामिन सी होता है। ये आप जानते हैं
आइये देखें इसके और क्या-क्या फायदे हैं ।
🍋नीबू के छिलके में ५ से १० गुना अधिक विटामिन सी होता है और वही हम फेंक देते हैं ।
🍋नींबू के छिलके में शरीर कॆ सभी विषेले द्रव्यों को बाहर निकालने कि क्षमता होती है ।
🍋नींबू का छिलका कैंसर का नाश करता है ।इसका छिलका कैमोथेरेपी से १०,००० गुना ज्यादा प्रभावी है ।
🍋यह बैक्टेरियल इन्फेक्शन, फंगस आदि पर भी प्रभावी है ।
🍋नींबू का रस विशेषत: छिलका, रक्तदाब तथा मानसिक दबाव को नियंत्रित करता है ।
🍋नींबू का छिलका १२ से ज्यादा प्रकार के कैंसर में पूर्ण प्रभावी है और वो भी बिना किसी साईड इफेक्ट के ।
🍋इसलिये आप अच्छे पके हुए तथा स्वच्छ नींबू फ्रीज़र में रखें और कद्दूकस कर प्रतिदिन अपने आहार के साथ प्रयोग करें ।

लू लगने पर प्राथमिक उपचार (First Aid for Heat Strokes in Hindi)

गर्मी के दिनों में कम से कम बाहर निकलकर लू से बचा जा सकता है। हालांकि अगर ऐसा संभव ना हो तो गर्मी के दिनों में अधिक से अधिक पानी पीना चाहिए और खाली पेट घर से नहीं निकलना चाहिए। अगर किसी को लू लग जाए तो उसे निम्न तरीके से उपचार (First Aid Treatment for Heat Stroke) देने का प्रयास करना चाहिए:
आहत व्यक्ति को पहले छांव में ला कर हवा का इंतजाम करें। गर्मी के कारण शरीर का तापमान बढ़ जाता है। छाया में लाने से शरीर का तापमान सामान्य आना शुरु हो जाता है।
उसको नमक शक्कर और पानी का घोल मुँह से पिलायें, उसके कपड़े निकालकर सिर्फ अंदरूनी वस्त्र रखें। शरीर पर हल्का सा गर्म पानी छिड़कें।
गीली चादर में लपेटकर तापमान कम करने का प्रयास करें।
हाथ पैर की मालिश करें जिससे रक्त संचरण प्रभावित होता है।
संभव हो तो बर्फ के टुकड़े कपड़े में लपेटकर गर्दन, बगलों और जांघों पर रखे। इससे गर्मी जल्दी निकलती है।
धूप में घर से बाहर निकलें तो छतरी का इस्तेमाल करें। नंगे बदन और नंगे पैर धूप में ना खड़े हों।
नींबू पानी, आम पना, छाछ, लस्सी, नारियल पानी, बेल या नींबू का शर्बत, खस का शर्बत जैसे तरल पदार्थ पीते रहें।
ढीले और सूती कपड़े पहनें।
खाली पेट बाहर ना जाएं और थोड़ी थोड़ी देर पर पानी पीते रहें।
गर्मी से एकदम ठंडे कमरे में ना जाएं।
दिन में दो बार नहाएं।
हरी सब्जियों का सेवन अधिक करें।
खीरा, ककड़ी, लौकी, तौरी जरूर खाएं।
ठंडे वातानुकूलित कमरे में रहें।
इमली के गूदे को हाथ पैरों पर मलें।
शरीर का तापमान तेज होने पर सिर पर ठंडी पट्टी रखें।
घर से बाहर निकलते समय जेब में कटा प्याज रखें।

मस्तिष्क के लिए हानि पहुचाने वाली आदतें*

1. प्रतिदिन नाश्ता न करना :- जो लोग नियमित रूप से नाश्ता नहीं लेते उन्हें मस्तिष्क में शर्करा के स्तर कम होने का खतरा बना रहता हे।यह खतरा पोषक तत्वों की अपर्याप्त आपूर्ति के कारण मस्तिष्क क्षति ग्रस्त (brain degeneration.) होने के कारण हो सकता हे।
2. अधिक खाना (Overeating) : – अधिक खाना खाने से मस्तिष्क की धमनियों(arteries) कोलेस्ट्रोल जम जाने से सख्त हो जाती हें, इससे कोशिकाओ(सेल्स)को पोषण में कमी हो जाती हे।यह मानसिक शक्ति(स्मरण एवं कार्य क्षमता) में कमी होने से होता हे।.
3. धूम्रपान (Smoking ) :- यह मस्तिष्क संकोचन(multiple brain shrinkage) का कारण बनता है जो अल्जाइमर(Alzheimer) रोग(भूल जाने का रोग) को जन्म दे सकता है।
4. बहुत मीठा खाते रहने से( High Sugar consumption ) :- अधिक चीनी या मीठे पदार्थो का सेवन से प्रोटीन और पोषक तत्वों के अवशोषण (absorption) में बाधा होने से कुपोषण और मस्तिष्क के विकास में कमी का कारण से भी मस्तिष्क को हानी पहुचती हे।
5.वायु प्रदूषण Air Pollution : -हमारा मस्तिष्क को हमारे शरीर में ऑक्सीजन की सबसे अधिक जरुरत होते हे, प्रदूषित हवा में श्वास (inhaling) लेने से मस्तिष्क को ऑक्सीजन की आपूर्ति कम हो जाती है, इससे मस्तिष्क की कार्य क्षमता या दक्षता में कमी होने लगती हे।

*चावल के बहुउपयोगी घरेलू नुस्खे *

* मांड यानी चावल पकाते समय बचा हुआ गाढ़ा सफेद पानी होता है। इसमें प्रोटीन, विटामिन्स व खनिज होते हैं जो स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होते हैं।
* जिनका पेट कमजोर हो यानी जो आसानी से भोजन न पचा पाते हों, उन्हें चावल में दूध मिलाकर 20 मिनट तक ढंककर रख दें, फिर खिलाएं तो आराम होगा।
* तीन साल पुराना चावल काफी स्वादिष्ट व ओजवर्धक होता है। चावल को मांड सहित खाना चाहिए। मांड अलग कर देने से चावल के प्रोटीन, खनिज, विटामिन्स निकल जाते हैं और यह बेकार भोजन कहलाता है।
* चावल, दाल (खासकर मूंग की), नमक, मिर्च, हींग, अदरक, मसाले मिलाकर बनाई गई खिचड़ी में घी मिलाकर सेवन करने से शरीर को बल मिलता है, बुद्धि विकास होता है व पाचन ठीक रहता है।
* अतिसार में चावल का आटा लेई की भांति पकाकर उसमें गाय का दूध मिलाकर रोगी को सेवन कराएं।
* पेट साफ न हो तो भात में दूध व शकर मिलाकर सेवन करने से दस्त के साथ पेट साफ हो जाता है। इसी के विपरीत भात को दही के साथ मिलाकर खाने से यदि दस्त लगे हों तो बंद हो जाते हैं।
* यदि भांग का नशा ज्यादा हो गया हो तो चावल धोकर निकाले पानी में खाने का सोडा दो चुटकी व शकर मिलाकर पिलाने से नशा उतर जाता है। यही पेय मूत्र विकार में भी काम आता है।
* सूर्योदय से पूर्व चावल की खील 25 ग्राम लेकर शहद मिलाकर खाकर सो जाएं। सप्ताहभर में आधासीसी सिर दर्द दूर हो जाएगा।

नेत्र रक्षा हेतु कुछ उपाय

​1) चलती हुई रेलगाड़ी वा मोटर में पढ़ने से, अथवा मुँह बाहर निकालने से धुआँ या मिट्टी पड़कर, आँखें खराब हो जाती हैं।_

_(2) सदैव सीधे बैठकर पढ़ो। पढ़ते समय पुस्तक आँखों से कम-से-कम 13 इंच दूर होनी चाहिए। लिखने और पढ़ने का कार्य कभी झुककर मत करो। झुककर लिखने और पढ़ने से नेत्र ज्योति मन्द होती ही है, साथ ही फेफड़े भी खराब होते हैं।_

_(3) दूसरे की सुर्मादानी, सलाई, तौलिया, टब, चश्मा आदि का प्रयोग मत करो। इससे नेत्र-रोगों की छूत फैलती है।_

_(4) ग्रहण की ओर नहीं देखना चाहिए। यदि देखना ही हो तो धुँधले शीशे के द्वारा देखो।_

_(5) यदि आँखें दुखनी आ रही हों तो ऐसी अवस्था में पढ़ना नहीं चाहिए, क्योंकि जोर पड़ने से रोग बढ़ जाता है।_

_(6) रात्रि में चन्द्रमा की ओर टकटकी लगाकर देखने से नेत्र ज्योति बढ़ती है।_

_(7) प्रातः ओस पड़ी हुई घास पर नंगे पैर घूमने से भी नेत्र ज्योति बढ़ती है।_

_(8) पैरों की तली में प्रतिदिन सरसों के तेल की मालिश करना आँखों के लिए बहुत लाभदायक है।_

_(9) *’चरक-संहिता’* में लिखा है कि नेत्रों के लिए किसी उत्तम सुर्मे का प्रतिदिन प्रयोग करना चाहिए। पाँचवें या सातवें दिन रसोत रगड़कर लगानी चाहिए। इससे नेत्रों का दूषित जल निकल जाता है और नेत्र-ज्योति तीव्र होती है।_

_(10) अच्छे प्रकाश में ही पढ़ना चाहिए। प्रकाश पीछे की ओर से, सीधे कन्धे की ओर से आना चाहिए; सामने की ओर से नहीं। टेबललैम्प का प्रयोग भी उत्तम है।_

_(11) सूर्योदय अथवा अस्त के समय धीरे-धीरे घटते या बढ़ते प्रकाश में पढ़ना आँखों के लिए बहुत हानिकारक है।_

_(12) रेलगाड़ी और बाजारों में घूम-घूमकर बेचने वालों से सुर्मा आदि कोई दवा नहीं लेनी चाहिए।_

_(13) दही से सिर धोना, कभी-कभी सिर में मक्खन अथवा बादाम-रोगन की मालिश करना, त्रिफला के छने हुए पानी से नेत्र धोना, सरसों का शुद्ध तेल आँखों में लगाना, शहद आँजना, गुलाबजल से आँखों को धोना, नाक में सरसों का तेल सूँघना, उत्तम सुर्मा या काजल लगाना–ये नेत्र-ज्योति बढ़ाने के उपाय हैं।_
_(मुरारी ब्रदर्स, कमलानगर, दिल्ली द्वारा निर्मित *’भीमसेनी काजल’* और *’नाग ज्योति’* सुर्मा आँखों के लिए बहुत लाभदायक है।)_

_(14) दृष्टि-दौर्बल्य के कारण यदि पढ़ने में सिर-दर्द होता हो तो चश्मा लगवा लेना चाहिए।_

_(15) खूँटीदार खड़ाऊँ का प्रयोग भी आँखों के लिए लाभदायक होता है।_

_(16) भोजन के पश्चात् हाथ धोकर मुख और आँखों पर फेरने से नेत्र-ज्योति बढ़ती है।_

_(17) मल-मूत्र आदि के वेगों को रोकने से नेत्र-ज्योति कम होती है, अतः इन वेगों को कदापि नहीं रोकना चाहिए।_

_(18) जब पढ़ते-पढ़ते नेत्र थक जाएँ तो बीच में कुछ विश्राम देना चाहिए। जब तक थकावट दूर न हो जाए, पुनः पढ़ना आरम्भ न करें।

स्त्रियों के रोग *

*(क) मासिक धर्म में गड़बड़ी*

*मूली―*हर महिने मासिक दो-चार दिन आगे पीछे हो जाता है। ऐसे में आने वाले मासिक धर्म से पहले मूली के बीजों का पाउडर दो-ढाई ग्राम(लगभग आधा चम्मच) सुबह-शाम फांकें। पर इससे आधा घण्टा पहले या बाद में पानी या जूस के अलावा कुछ न सेवन करें।

*लहसुन–*लहसुन की दो कलियाँ छील-काटकर पानी में गरम कर लें। हल्का गरम हो जाए तो धीरे-धीरे पानी पीएं एवं लहसुन को चबा-चबाकर खाएं। दिन में तीन-चार बार ऐसा करें।

*अंगूर―*अंगूर खाने से मासिक धर्म नियमित हो जाता है।

*चुकन्दर–*चुकन्दर का रस मासिक गड़बड़ी दूर करता है।

*तुलसी–*तुलसी के बीज, पलाश, पीपल, असगन्ध और नागकेशर समान मात्रा में लेकर कूट-पीस-छान लें। दस ग्राम रोज सुबह गाय के दूध के साथ लें। तीसरे महिने से महिना नियमित हो जायेगा।

*(ख) मासिक धर्म रुकना*

*प्याज–*छटांक भर प्याज काटकर सूप बनाएं। उसमें थोड़ा सा गुड़ मिलाकर गर्म करके स्त्री को दो-तीन बार पिला दें।

*बथुआ–*दो चम्मच बथुआ के बीज गिलास भर पानी में उबालें। आधा पानी शेष रहे तो उसे छानकर पीएं। बथुआ की सब्जी भी खाएँ।

*नमक–*दो ग्राम नमक पानी के साथ दिन में तीन बार पीएँ।

*अदरक–*सोंठ पचास ग्राम, गुड़ तीस ग्राम और बायविडंग पांच ग्राम जौकुट करके ढाई सौ ग्राम पानी में पकाएँ। आधा कप तीन-तीन घण्टे बाद पीने से मासिक धर्म आ जाएगा।

*मेथी–*दस-दस ग्राम मेथी, सोया, मूली, गाजर के बीज पीस लें। ढाई-ढाई घण्टे बाद इस चूर्ण को पानी के साथ दें।

*शहद―*गरम पानी में शहद डालकर पीएँ।

*गाजर―*पन्द्रह-बीस ग्राम गाजर के बीजों को गिलास भर पानी में उबालें। आधा पानी बच जाए तो उसे पीएं।

*(ग) मासिक धर्म न रुकना*

*मेथी–*तीन ग्राम मेथी ढाई सौ ग्राम दूध में उबालें। ठण्डा होने पर दूध छानकर पी लें।

*दूध-घी–*एक पका केला गाय के घी के साथ खाएं।

*नीम–*नीम की कोपलों का रस पीएं।

*अनार―*अनार के सूखे छिलकों को पीस लें। एक चम्मच ठण्डे पानी से फांक लें।

*धनिया―*(१) बीस ग्राम धनिया दो सौ ग्राम पानी में उबालें। पचास ग्राम पानी रह जाए तो उसे छानकर मिश्री मिलाकर पीएँ।

(२) पिसा हुआ धनिया, बूरा और घी सममात्रा में दो-तीन चम्मच तीन-चार बार खा लें। रक्तस्राव बन्द हो जाएगा।

*(घ) मासिक में अधिक रक्तस्राव*

*आंवला―*(१) पके हुए दो केलों को मीज लें। उसमें दो पके आंवले का रस मिलाकर दिन में चार बार खाएँ।

(२) दो तोला सूखा आँवला रात में भिगो दे सुबह उसे मल लें। उसे मिश्री मिलाकर पीएँ।

*तुलसी―*तुलसी की जड़ को कूट-पीसकर चूर्ण बना लें। इसे पान में मिलाकर खाएँ।

*दही-मट्ठा―*सौ ग्राम दही हो तो दो गुना पानी तथा एक-डेढ़ ग्राम फिटकरी मिलाकर पीएँ।

*(ङ) मासिक धर्म में पीड़ा*

कुछ स्त्रियों के मासिक धर्म के शुरु होने से अन्त तक कमर, पेडू, गर्भाशय आदि में दर्द रहता है। इस तरह के कष्टों से बचने के लिए निम्न उपाय हैं―

*प्याज―*यदि पेडू में दर्द हो, दिल घबराता हो, सिर दर्द, आंखों में जलन, उबकाई आती हो तो लाल प्याज कूटकर आधा ग्राम रस निकालें। आधा ग्राम रसौत घोलकर पी लें।

*नीम―*नीम की पत्तियाँ गरम करके नाभि के नीचे बांध लें।

*गाजर―*दो चम्मच गाजर के बीज में एक चम्मच गुड़, एक गिलास पानी म़े उबालकर नित्य सुबह-शाम दो बार गरम-गरम पीयें।

*मूली―*मूली के बीजों का चूर्ण चार-चार ग्राम मात्रा में सुबह-दोपहर और शाम को फांक लें।

*हींग―*हींग का सेवन करें।

*सोंठ―*सोंठ और पुराने गुड़ का काढ़ा पीएँ।

वेरिकोस वेन

में गोमूत्र 1 चम्मच + पारिजातक के 15 पत्तों के 1/4 काढा के साथ लेने से 8 days में आराम मिलता है। यह गाँव – आदि वासी लोगों का उपाय है।

इनके लिए शास्त्रों के अनुसार एक संपूर्ण चिकित्सा जो Deep Vein Thrombosis, Varicose Veins, Coronary Venous diseases, Coronary Arteries Diseases के लिए बहुत बहुत उपयोगी हैं-
1.रक्तपाचक= पटेल सारिवा मुस्ता पाठा कुटकी ( अष्टांग हृदय चिकित्सा स्थान- 1.48
, ताप्यादि लोह, मुक्ता पिष्टी, प्रवाल भस्म, अनंता, चँद्रकला रस, वसँत कुसुमाकर रस, वासा, प्लक्ष, उशीर,

सुबह- शाम पानी के साथ

2. आरोग्यवर्धिनी रस,
मेदोपाचक= किराततिक्त, अमृता, चंदन, शुण्ठी
चंद्रप्रभा
नित्यानंद रस
दोपहर – रात्रि शहद के साथ

3. रात्री में तादुंलजा बीज (मराठी नाम)
अविपत्तीकर चुर्ण

4मनूक्का(किशमिश) के फाँट के साथ

.5 सर्वांग में कासीसादी या प्रसारिणी तैल से अभ्यंग

6 . शालि षष्टि पिंड स्वेद करें

7 रक्तवाहिन्यों को छोडकर जलौका लगावें

जैसे पैरों में Varicose Veins या सिराज ग्रंथी हो तो Quadricep Femoris Muscle ke medial border में जलौका लगावें

अगर direct Varicose Veins पर लगाया तो Varicose ulcer हो जाता है

8. मुस्तादि यापना बस्ति का उपयोग लाभकारी होता है।

9 कपालभाति सुबह और शितली सितकारी प्राणायाम दोपहर में करें

10. रक्तवाहिन्यों पर और रक्तवाहिन्यों के Valves पर काम करने वाले nerves / मज्जा तंतु की विकृति में अगरM. R.I reports में deformities दिखे वँश( बाँस) पत्र, वचा, हरिद्रा का लेप करें

ऐसा किया तो 7 Months में रोगी ठीक हो जाता है।।

11. पित्त और मेद को ध्यान में रखकर पथ्य की योजना करें

वेरिकोस वेन

में गोमूत्र 1 चम्मच + पारिजातक के 15 पत्तों के 1/4 काढा के साथ लेने से 8 days में आराम मिलता है। यह गाँव – आदि वासी लोगों का उपाय है।

इनके लिए शास्त्रों के अनुसार एक संपूर्ण चिकित्सा जो Deep Vein Thrombosis, Varicose Veins, Coronary Venous diseases, Coronary Arteries Diseases के लिए बहुत बहुत उपयोगी हैं-
1.रक्तपाचक= पटेल सारिवा मुस्ता पाठा कुटकी ( अष्टांग हृदय चिकित्सा स्थान- 1.48
, ताप्यादि लोह, मुक्ता पिष्टी, प्रवाल भस्म, अनंता, चँद्रकला रस, वसँत कुसुमाकर रस, वासा, प्लक्ष, उशीर,

सुबह- शाम पानी के साथ

2. आरोग्यवर्धिनी रस,
मेदोपाचक= किराततिक्त, अमृता, चंदन, शुण्ठी
चंद्रप्रभा
नित्यानंद रस
दोपहर – रात्रि शहद के साथ

3. रात्री में तादुंलजा बीज (मराठी नाम)
अविपत्तीकर चुर्ण

4मनूक्का(किशमिश) के फाँट के साथ

.5 सर्वांग में कासीसादी या प्रसारिणी तैल से अभ्यंग

6 . शालि षष्टि पिंड स्वेद करें

7 रक्तवाहिन्यों को छोडकर जलौका लगावें

जैसे पैरों में Varicose Veins या सिराज ग्रंथी हो तो Quadricep Femoris Muscle ke medial border में जलौका लगावें

अगर direct Varicose Veins पर लगाया तो Varicose ulcer हो जाता है

8. मुस्तादि यापना बस्ति का उपयोग लाभकारी होता है।

9 कपालभाति सुबह और शितली सितकारी प्राणायाम दोपहर में करें

10. रक्तवाहिन्यों पर और रक्तवाहिन्यों के Valves पर काम करने वाले nerves / मज्जा तंतु की विकृति में अगरM. R.I reports में deformities दिखे वँश( बाँस) पत्र, वचा, हरिद्रा का लेप करें

ऐसा किया तो 7 Months में रोगी ठीक हो जाता है।।

11. पित्त और मेद को ध्यान में रखकर पथ्य की योजना करें

मोतियाबिंद से बचाव और उपचार:–

जब आँख के लैंस की पारदर्शिता हल्की या समाप्त होने लगती है धुंधला दिखने लगता है तो उसे मोतियाबिंद कहते है । इस रोग में आँखों की काली पुतलियों में सफ़ेद मोती जैसा बिंदु उत्पन्न होता है जिससे व्यक्ति की आँखों की देखने की क्षमता कम हो जाती है ज्यादातर यह रोग 40 वर्ष के बाद होता है। मोतियाबिंद उम्र , मधुमेह, विटामिन या प्रोटीन की कमी , संक्रमण, सूजन या किसी चोट की वजह से भी सकता है ।

* मोतियाबिंद से बचाव के लिए सुबह जागने के बाद मुंह में ठंडा पानी भरकर पूरी आँखें खोलकर आंखों पर पानी के 8-10 बार छींटे मारें।

* 1 चम्मच त्रिफला चूर्ण, आधा चम्मच देसी घी और 1 चम्मच शहद को मिला लें। इसे रोज सुबह खाली पेट ले। इससे मोतियाबिंद के साथ-साथ आंखों की कई दूसरी बीमारियों से भी बचाव होता है।

* मोतियाबिंद से बचने और आँखों की रौशनी तेज करने लिए प्रतिदिन गाजर, संतरे, दूध और घी का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करें।

* एक बूंद प्याज का रस और एक बूंद शहद मिलाकर इसे काजल की तरह रोजाना आंख में लगाएं। आँखों की समस्या शीघ्र ही दूर होगी।

* एक चम्मच घी, दो काली मिर्च और थोड़ी-सी मिश्री मिलाकर दिन में तीन बार इसका सेवन करें ।

* सौंफ और धनिया को बराबर मात्रा में लेकर उसमें हल्की भुनी हुई भूरी चीनी मिलाएं इसको एक एक चम्मच सुबह शाम सेवन करने से भी बहुत लाभ मिलता है।

* 6 बादाम की गिरी और 6 दाने साबुत काली मिर्च पीसकर मिश्री के साथ सुबह पानी के साथ लेने पर भी मोतियाबिंद में लाभ मिलता है।

* आँखोँ की तकलीफ में गाय के दूध का नियमित रूप से सेवन करना चाहिए ।

* गाजर, पालक, आंवलें के रस का सेवन करने से मोतियाबिंद 2-3 महीने में कटकर ख़त्म हो जाता है ।

* एक चम्मच पिसा हुआ धनिया एक कप पानी में उबाल कर छान लें ठंडा होने पर सुबह शाम आँखों में डाले इससे भी मोतियाबिंद में आराम मिलता है ।

* हल्दी मोतियाबिंद होने से रोकती है। हल्दी में करक्युमिन नामक रसायन होता है जो रोग प्रतिरोधक शक्ति को बढ़ाता है और साइटोकाइन्स तथा एंजाइम्स को नियंत्रित करता है।इसलिए हल्दी का अधिक से अधिक सेवन करना चाहिए।

* आंखों में मोतियाबिंद और रतौंधी हो जाने पर नीम के तेल को सलाई से आंखों में अंजन की तरह से लगाएं।

“पानी पिने का सही वक़्त”

(1) 3 गिलास सुबह उठने के बाद,​​
…..अंदरूनी उर्जा को Activate
करता है…
(2) 1 गिलास नहाने के बाद,
……ब्लड प्रेशर का खात्मा करता है…
(3) 2 गिलास खाने से 30 Minute पहले,
……..हाजमे को दुरुस्त रखता है..
(4) आधा गिलास सोने से पहले,
……हार्ट अटैक से बचाता है..

करेला खाने के लाभ :-

1- लीवर संबंधी बीमारियों में करेला काफी फायेमंद है।

​​
2- करेला खून साफ करता है और हीमोग्लोबिन बढ़ाता है।

3- करेला पाचन शक्ति को दुरुस्त करता है जिससे भूख बढ़ती है।

4- दमा के मरीज को बिना मसाले की छौंकी हुई करेले की सब्जी खिलानी चाहिए।

5- करेले के रस को नींबू के रस के साथ पानी में मिलाकर पीने से वजन कम होता है।

6- करेले ठंडा होता है, इसलिए यह गर्मी से पैदा हुई बीमारियों के उपचार के लिए फायदेमंद है।

7- लकवा के मरीजों के लिए करेला बहुत फायदेमंद होता है। उन्हें कच्चा करेला खिलाना चाहिए।

8- कफ होने पर करेले का सेवन करना चाहिए। करेले में फास्फोरस होता है जिससे कफ दूर होता है।

9- मधुमेह यानि डायबिटीज के लिए तो करेला रामबाण इलाज है। इससे शुगर लेवल नियंत्रित रहता है।

10- पीलिया के रोगियों के लिए भी करेला बहुत फायदेमंद है। उन्हें पानी में करेला पीसकर खाना चाहिए।

11- उल्टी, दस्त या हैजा होने पर करेले के रस में थोड़ा पानी और काला नमक डालकर पीने से फायदा होता है।

12- बवासीर होने पर एक चम्मच करेले के रस में आधा चम्मच शक्कर मिलाकर एक महीने तक खाएं, फायदा होगा।

13- गठिया रोग होने या हाथ-पैर में जलन होने पर करेले के रस से मालिश करना चाहिए। इससे बहुत आराम मिलेगा।

14- जलोदर रोग होने पर आधा कप पानी में 2 चम्मच करेले का रस मिलाकर रोजाना तीन-चार बार पिएं, कुछ ही समय में फायदा दिखाई देगा।

दूध के अनेको फायदे

दूध शरीर के लिए कैल्शियम की पूर्ति का सबसे अच्छा स्रोत है। शरीर की हड्डियों को मजबूत रखने और हड्डियों की कमजोरी को रोकने के लिए कैल्शियम की जरूरत पड़ती है। यह विटामिन और पोषक तत्वों का एक बड़ा स्रोत है। देसी गाय का दूध स्वास्थ्यवर्धक होता है।
1 आजकल अधिकतर बच्चे दूध पीना पसंद नहीं करते और उनके माता-पिता को चिंता रहती है। बच्चों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप कैल्शियम मिल पा रहा है या नहीं क्योंकि कैल्शियम की कमी के कारण उन्हें आगे चलकर हड्डियों संबंधी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए बच्चे दूध में यदि वनीला या चाकलेट मिलाकर पीना चाहें तो इसमें कोई हर्ज नहीं है क्योंकि दूध से ही शरीर को आवश्यक कैल्शियम का 75 प्रतिशत भाग प्राप्त होता है। ।
2 हर रोज एक गिलास दूध पीने से दिमागी क्षमता तेज होती है। दूध न सिर्फ पोषक तत्वों से भरपूर होता है बल्कि इससे ब्रेन पावर पर सकारात्मक असर पड़ता है और मानसिक क्षमता तेज होती है।
3 दूध से बड़ी मात्रा में वीर्य बनता है।
4 गाय के दूध के नियमित सेवन से पेट के कैंसर की कोशिकाओं को बढ़ने से रोका जा सकता है या ट्यूमर बढ़ाने के लिए जिम्मेदार प्रोटीन बेसलिन 1 को रोकने में भी यह काफी अहम हो सकता है।
5 रात को सोने से पहले एक गिलास गुनगुना दूध पीने से तनाव कम होता है और नींद अच्छी आती है।
6 दूध में मौजूद कैल्शियम, पोटेशियम और प्रोटीन ब्लड प्रैशर को संतुलित रखते हैं।
7 व्यायाम करने के उपरांत अवश्य दूध पिएं। इससे कोशिकाओं में होने वाली टूट-फूट की मुरम्मत के लिए शरीर को आवश्यक ऊर्जा मिलती है।
8 दूध में लैक्टिक एसिड होता है, जो त्वचा को मुलायम रखता है। चमचमाती त्वचा पाना चाहते हैं तो कच्चा दूध रूई की सहायता से त्वचा पर लगाएं।
9 दूध के साथ कभी भी नमकीन या खट्टे पदार्थ ना लें अन्यथा त्वचा विकार हो सकते हैं।

नशा छोड़ने के उपाय

मित्रो बहुत से लोग नशा छोडना चाहते है पर उनसे छुटता नहीं है !बार बार वो कहते है हमे मालूम है ये गुटका खाना,तम्बाकू खाना,सिगरेट पीना,शराब पीना बुरा है लेकिन तलब का क्या करे।
तो आपको बीड़ी सिगरेट की तलब न आए गुटका खाने के तलब न लगे ! शारब पीने की तलब न लगे ! इसके लिए बहुत अच्छे दो उपाय है हमे व्हाट्स एप पर मिले है जो आप बहुत आसानी से कर सकते है ! पहला ये की जिनको बार बार तलब लगती है जो अपनी तलब पर कंट्रोल
नहीं कर पाते नियंत्रण नहीं कर पाते इसका मतलब उनका मन कमजोर है ! तो पहले मन को मजबूत बनाओ!
मन को मजबूत बनाने का सबसे आसान उपाय है पहले थोड़ी देर आराम से बैठ जाओ ! आलती पालती मार कर बैठ जाओ !
जिसको सुख आसन कहते हैं ! और फिर अपनी आखे बंद कर लो
फिर अपनी दाहिनी(right side) नाक बंद कर लो और खाली बायी(left side) नाक से सांस भरो और छोड़ो ! फिर सांस भरो और छोड़ो फिर सांस भरो और छोड़ो !
बायीं नाक मे चंद्र नाड़ी होती है और दाई नाक मे सूर्य नाड़ी ! चंद्र नाड़ी जितनी सक्रिये (active) होगी उतना इंसान का मन उतना ज्यादा मजबूत होता है ! और इससे संकल्प शक्ति बढ़ती है !
और आप इतने संकल्पवान हो जाएंगे ! और जो बात ठान लेंगे उसको बहुत आसानी से कर लेगें ! तो पहले रोज सुबह 5 मिनट तक नाक की
right side को दबा कर left side से सांस भरे और छोड़ो ! ये एक तरीका है ! और बहुत आसान है !
दूसरा एक तरीका है आपके घर मे एक आयुर्वेदिक ओषधि है
जिसको आप सब अच्छे से जानते है और पहचानते हैं ! और उस ओषधि का नाम है अदरक ! और
आसानी से सबके घर मे होती है ! इस अदरक के टुकड़े कर लो
छोटे छोटे उस मे नींबू निचोड़ दो थोड़ा सा काला नमक मिला लो और इसको धूप मे सूखा लो ! सुखाने के बाद जब इसका पूरा पानी खतम हो जाए तो इन अदरक के टुकड़ो को अपनी जेब मे रख लो ! जब भी दिल करे गुटका खाना है तंबाकू
खाना है बीड़ी सिगरेट पीनी है ! तो आप एक अदरक का टुकड़ा निकालकर मुह में चूसते रहे।
आप इसे दाँत से काटो मत और सवेरे से
शाम तक मुंह मे रखो तो शाम तक आपके मुंह मे सुरक्षित रहता है !
इसको चूसते रहो आपको गुटका खाने की तलब ही नहीं उठेगी ! तंबाकू सिगरेट लेने की इच्छा ही नहीं होगी शराब पीने का मन ही नहीं करेगा !
सुखाने के बाद जब इसका पूरा पानी खतम हो जाए जैसे ही इसका रस लाड़ मे घुलना शुरू हो जाएगा आप देखना इसका चमत्कारी असर होगा आपको फिर गुटका –तंबाकू शराब –बीड़ी सिगरेट आदि की इच्छा ही नहीं होगी !
सुबह से शाम तक चूसते रहो ! और 10 -15 -20 दिन लगातार कर लिया ! तो हमेशा के लिए नशा आपका छूट जाएगा !
आप बोलेगे ये अदरक मैं ऐसे क्या चीज है ????
यह अदरक मे एक ऐसे चीज है जिसे हम रसायनशास्त्र (केमेंस्ट्री) मे कहते है सल्फर !
अदरक मे सल्फर बहुत अधिक मात्रा मे है ! और जब हम अदरक को चूसते है जो हमारी लार के साथ मिल कर अंदर जाने लगता है !
तो ये सल्फर जब खून मे मिलने लगता है ! तो यह अंदर ऐसे हारमोनस को सक्रिय कर देता है ! जो हमारे नशा करने कीइच्छा को खत्म कर देता है !
और विज्ञान की जो रिसर्च है सारी दुनिया मे वो यह मानती है की कोई आदमी नशा तब करता है ! जब उसके शरीर मे सल्फर की कमी होती है ! तो उसको बार बार तलब लगती है बीड़ी सिगरेट तंबाकू आदि की ! तो सल्फर की मात्रा
आप पूरी कर दो बाहर से ये तलब खत्म हो जाएगी ! इसका हजारो लोगो पर परीक्षण किया गया और बहुत ही सुखद प्रणाम सामने आए है ! बिना किसी खर्चे के शराब छूट जाती है बीड़ी सिगरेट शराब गुटका आदि छूट जाता
है ! तो आप इसका प्रयोग करे !
और इसका दूसरे उपयोग का तरीका पढे !
अदरक के रूप मे सल्फर भगवान ने बहुत अधिक मात्रा मे दिया
है ! और सस्ता है! इसी सल्फर को आप होमिओपेथी की दुकान से भी प्राप्त कर सकते हैं ! आप कोई भी होमिओपेथी की दुकान मे चले जाओ और विक्रेता को बोलो मुझे सल्फर नाम
की दवा देदो ! वो देदेगा आपको शीशी मे भरी हुई दवा देदेगा ! और सल्फर नाम की दवा होमिओपेथी मे पानी के रूप मे आती है प्रवाही के रूप मे आती है जिसको हम Dilution कहते
है अँग्रेजी मे !
तो यह पानी जैसे आएगी देखने मे ऐसे ही लगेगा जैसे यह पानी है ! 5 मिली लीटर दवा की शीशी 5 रूपये आती है ! और उस दवा का एक बूंद जीभ पर दाल लो सवेरे सवेरे खाली पेट ! फिर
अगले दिन और एक बूंद डाल लो ! 3 खुराक लेते ही 50 से 60 % लोग की दारू छूट जाती है ! और जो ज्यादा पियाकड़ है !
जिनकी सुबह दारू से शुरू होती है और शाम दारू पर खतम होती है ! वो लोग हफ्ते मे दो दो बार लेते रहे तो एक दो महीने तक
करे बड़े बड़े पियक्कड़ो की दारू छूट जाएगी ! जो सुबह से पीना शुरू करते थे और रात तक पीते रहते थे ! उनकी भी दारू छूट गई बस
इतना ही है दो तीन महीने का समय लगा !
तो ये सल्फर अदरक मे भी है ! होमिओपेथी की दुकान पर आप आसानी से खरीद सकते है !लेकिन जब आप होमिओपेथी की दुकान पर खरीदने जाओगे तो वो आपको
पुछेगा कितनी ताकत (पोटेंसी )की दवा दूँ ??!
तो आप उसको कहे 200 potency की दवा देदो ! आप सल्फर 200 कह कर भी मांग सकते
है ! लेकिन जो बहुत ही पियकर है उनके लिए आप 1000 Potency की दवा ले !आप 200 मिली लीटर का बोतल खरीद लो एक 150 से रुपए मे मिलेगी ! आप उससे 10000 लोगो की शराब छुड़वा सकते हैं ! मात्र एक बोतल से ! लेकिन साथ मे आप मन को मजबूत बनाने के लिए रोज सुबह बायीं नाक से सांस ले ! और
अपनी इच्छा शक्ति मजबूत करे !!!
अब एक खास बात !
बहुत ज्यादा चाय और काफी पीने वालों के शरीर मे arsenic तत्व की कमी होती है !
उसके लिए आप arsenic 200 का प्रयोग करे !
गुटका,तंबाकू,सिगरेट,बीड़ी पीने वालों के शरीर मे
phosphorus तत्व की कमी होती है !
उसके लिए आप phosphorus 200 का प्रयोग करे !
और शराब पीने वाले मे सबसे ज्यादा sulphur तत्व की कमी होती है !
उसके लिए आप sulphur 200 का प्रयोग करे !!
सबसे पहले शुरुवात आप अदरक से ही करे !!

कैंसर के घरेलु उपचार

केंसर ने आज हर जगह पर फैला लिए है इसका मुख्य कारण धुम्रपान और मद्यपान को माना जाता है किंतु अब यह किसी को भी और किसी भी उम्र में हो सकता है इसका कारण है हमारी अनियमित और बदलती जीवन शैली,खानपान और पर्यावरण में बदलाव ।
। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार 33% महिलाओ और 25% पुरुषो को उनके जीवनकाल में कैंसर होने की सम्भावना होती है। डब्ल्यूएचओ (WHO) की एक रिपोर्ट के अनुसार 2020 तक देश के प्रत्येक घर का एक व्यक्ति कैंसर से पीड़ित होगा। लेकिन हर व्यक्ति के स्वस्थ जीवनशैली अपनाने से 40-50% कैंसर से बचाव भी संभव है। मासिक स्वयं जाँच के द्वारा 10-20% कैंसर मामलो का पता लगाया जा सकता है। कैंसर की समय से पहचान और इलाज होने पर इसको पूर्ण रूप से ठीक करना संभव है। और ठीक होने के बाद कोई भी व्यक्ति सामान्य रुप से जिंदगी को जी सकता है।

हमारे शरीर की सबसे छोटी यूनिट सेल (कोशिका) है। शरीर में 100 से 1000 खरब सेल्स होते हैं। हर वक्त ढेरों सेल पैदा होते रहते हैं और पुराने व खराब सेल खत्म भी होते रहते हैं। लेकिन कैंसर में यह संतुलन बिगड़ जाता है। उनमें सेल्स की बेलगाम बढ़ोतरी होती रहती है।गलत लाइफस्टाइल और तंबाकू, शराब जैसी चीजें किसी सेल के जेनेटिक कोड में बदलाव लाकर कैंसर पैदा कर देती हैं। कैंसर सेल अपने जैसे सेल बेतरतीब तरीके से पैदा करता जाता है। वे सही सेल्स के कामकाज में रुकावट डालने लगते हैं। कैंसर सेल एक जगह टिककर नहीं रहते। वे शरीर में किसी दूसरी जगह जमकर वहां भी अपने तरह के बीमार सेल्स का ढेर बना डालते हैं और उस अंग के कामकाज में भी रुकावट आने लगती है। इन अधूरे बीमार सेल्स का समूह ही कैंसर है। अर्थात कैंसर एक बेकाबू व हद से ज्यादा कोशिकाओं के अधिक बढ़ने वाली घातक बीमारी है।

भारत में पुरुषो में फेफड़ो,आवाज की नली ,गले, जीभ ,मुह, खाने की नली ,पित्ताशय,पौरुष-ग्रंथि(प्रोटेस्ट), इत्यादि कैंसर होने की सम्भावना अधिकतर होती है जबकि महिलाओं में स्तन,गर्भाशय, ग्रीवा, मसाना, अंडाशय, थाइरॉइड, फेफड़े, गले,जीभ, पित्ताशय, व मस्तिष्क के कैंसर की सम्भावना अधिक होती है।

कैंसर के लक्षण:—-

* मुंह के अंदर छालों का होना, सफ़ेद, लाल या भूरे धब्बो का पाया जाना, मुंह का सिकुड़ना और पूरी तरह से मुंह का न खुलना ।

* शौच या मूत्र की आदतो में बदलाव आना ।

* कभी न ठीक/न भरने वाला घाव/नासूर आदि का होना।

* स्तन में/या शरीर के किसी हिस्से में गांठ व असामान्य उभार।

* याददाश्त में कमी, देखने-सुनने में दिक्कत होना , सिर में भारी दर्द होना ।

* कमर या पीठ में लगातार दर्द ।

* मुंह खोलने, चबाने, निगलने या खाना हजम करने में परेशानी होना।

* शरीर के किसी भी तिल/मस्से के आकार व रंग में बदलाव का होना।

* लगातार होने वाली खांसी व आवाज का बैठ जाना ।

* यदि इन लक्षणों में से कोई भी लक्षण 2 हफ्ते से अधिक समय तक हो तो तुरंत इसकी जाँच किसी अच्छे डाक्टर से कराये की कहीं ये कैंसर तो नही है वैसे इन लक्षणों के अन्य कोई और कारण भी हो सकते है।

कैंसर के कारण —

* तम्बाकू ,पान मसाला ,खैनी ,सुपारी इत्यादि से कैंसर के होने की सम्भावना बहुत ज्यादा बड़ जाती है।

* शराब भी कैंसर को बढ़ावा देती है , अत: इसका बहुत ही कम या बिलकुल भी सेवन ना करें ।

* मीट को हजम करने में ज्यादा एंजाइम और ज्यादा वक्त लगता है। ज्यादा देर तक बिना पचा खाना पेट में एसिड और दूसरे जहरीले रसायन बनाते हैं, जिनसे भी कैंसर को बढ़ावा मिलता है।

* अधिक तले भुने चर्बी वाले खाद्द्य पदार्थों से भी कैंसर हो सकता है ।

* मोटपा , किसी संक्रमणों ,जैसे एच.आई वी ,हेपेटाइटिस बी आदि की वजह से भी कैंसर की सम्भावना होती है ।

* अनुवांशिक कारण /खानदानी कैंसर होना।

* धुँआ ,प्रदूषण ,कीटनाशक ,पेंट ,थिनर आदि ।

* इसके अतिरिक्त कोई अज्ञात कारण से भी कैंसर संभव है ।

कैंसर से बचाव :–

* पेड़-पौधों से बनीं रेशेदार चीजें जैसे फल, सब्जियां व अनाज खाइए।

* चर्बी वाले खानों से परहेज करें। मीट, तला हुआ खाना या ऊपर से घी-तेल लेने से यथासम्भव बचना चाहिए।

* शराब का सेवन कतई न करें या करें तो सीमित मात्रा में।

* खाने में फफूंद व बैक्टीरिया आदि बिलकुल भी न पैदा हो सके ऐसे खाने को तुरंत फ़ेंक दे । खाने में अतिरिक्त नमक डालने से बचें।

* ज्यादा कैलोरी वाला खाना कम मात्रा में खाएं, नियमित कसरत करें।

* विटामिंस और मिनरल्स की गोलियां कम से कम खाएं संतुलित खाने को तहरीज़ दें ।

* दर्द-निवारक और दूसरी दवाइयां खुद ही, बेवजह खाते रहने की आदत छोड़ें।

* कैंसर की समय समय पर जाँच अवश्य ही कराते चलें ।

कैंसर में खानपान वा सावधानियां :–

* लाल, नीले, पीले और जामुनी रंग की फल-सब्जियां जैसे टमाटर, जामुन, काले अंगूर, अमरूद, पपीता, तरबूज आदि खाने से कैंसर का खतरा कम हो जाता है। इनको ज्यादा से ज्यादा अपने भोजन में शामिल करें । * हल्दी का अपने खाने में प्रतिदिन सेवन करें । हल्दी ठीक सेल्स को छेड़े बिना ट्यूमर के बीमार सेल्स की बढ़ोतरी को धीमा करती है।

* हरी चाय स्किन, आंत ब्रेस्ट, पेट , लिवर और फेफड़ों के कैंसर को रोकने में मदद करती है। लेकिन यदि चाय की पत्ती अगर प्रोसेस की गई हो तो उसके ज्यादातर गुण गायब हो जाते हैं।

* सोयाबीन या उसके बने उत्पादों का प्रयोग करें । सोया प्रॉडक्ट्स खाने से ब्रेस्ट और प्रोस्टेट कैंसर की आशंका कम होती है।

* बादाम, किशमिश आदि ड्राई फ्रूट्स खाने से कैंसर का फैलाव रुकता है।

* पत्तागोभी, फूलगोभी, ब्रोकली आदि में कैंसर को ख़त्म करने का गुण होता है।

* कैंसर के इलाज / बचाव में लहसुन बहुत ही प्रभावी है । इसलिए रोज लहसुन अवश्य खाएं। इससे शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत होती है।

* रोज नींबू, संतरा या मौसमी में से कम-से-कम एक फल अवश्य ही खाएं। इससे मुंह, गले और पेट के कैंसर की आशंका बहुत ही कम हो जाती है।

* ऑर्गेनिक फूड का ज्यादा से ज्यादा उपयोग करें ,ऑर्गेनिक यानी वे दालें, सब्जियां, फल जिनके उत्पादन में पेस्टीसाइड और केमिकल खादें इस्तेमाल नहीं हुई हों।

* पानी पर्याप्त मात्रा में पीएं, रोज सुबह उठकर रात को ताम्बे के बर्तन रखा 3-4 गिलास पानी अवश्य ही पियें ।

* रोज 15 मिनट तक सूर्य की हल्की रोशनी में बैठें।

* नियमित रूप से व्यायाम करें।

* कैंसर का पता लगने पर दूध या दूध के बने पदार्थों का उपयोग बंद कर दें । इनसे व्यक्ति को नहीं वरन कैंसर के बैक्टीरिया को ताकत मिलती है ।

* नियमित रूप से गेंहू के पौधे के रस का सेवन करें ।

* तुलसी और हल्दी से मुंह में होने वाले इस जटिल रोग का इलाज संभव है।वैसे तो तुलसी और हल्दी में कुदरती आयुर्वेदिक गुण होते ही हैं मगर इसमें कैंसर रोकने वाले महत्वपूर्ण एंटी इंफ्लेमेटरी तत्व भी होते हैं। तुलसी इस रोग में प्रतिरोधक क्षमता बढ़ा देती है। घाव भरने में भी तुलसी मददगार होती है।

* एक से अधिक साथी से यौन सम्बन्ध न रखने से भी मासाने व गर्भास्य के कैंसर से बचा जा सकता है।

* अनार का ज्यादा से ज्यादा उपयोग करें अनार कैंसर के इलाज खासकर स्तन कैंसर में बहुत ही प्रभावी माना गया है ।

लू लगने पर प्राथमिक उपचार (First Aid for Heat Strokes in Hindi)

गर्मी के दिनों में कम से कम बाहर निकलकर लू से बचा जा सकता है। हालांकि अगर ऐसा संभव ना हो तो गर्मी के दिनों में अधिक से अधिक पानी पीना चाहिए और खाली पेट घर से नहीं निकलना चाहिए। अगर किसी को लू लग जाए तो उसे निम्न तरीके से उपचार (First Aid Treatment for Heat Stroke) देने का प्रयास करना चाहिए:
आहत व्यक्ति को पहले छांव में ला कर हवा का इंतजाम करें। गर्मी के कारण शरीर का तापमान बढ़ जाता है। छाया में लाने से शरीर का तापमान सामान्य आना शुरु हो जाता है।
उसको नमक शक्कर और पानी का घोल मुँह से पिलायें, उसके कपड़े निकालकर सिर्फ अंदरूनी वस्त्र रखें। शरीर पर हल्का सा गर्म पानी छिड़कें।
गीली चादर में लपेटकर तापमान कम करने का प्रयास करें।
हाथ पैर की मालिश करें जिससे रक्त संचरण प्रभावित होता है।
संभव हो तो बर्फ के टुकड़े कपड़े में लपेटकर गर्दन, बगलों और जांघों पर रखे। इससे गर्मी जल्दी निकलती है।
धूप में घर से बाहर निकलें तो छतरी का इस्तेमाल करें। नंगे बदन और नंगे पैर धूप में ना खड़े हों।
नींबू पानी, आम पना, छाछ, लस्सी, नारियल पानी, बेल या नींबू का शर्बत, खस का शर्बत जैसे तरल पदार्थ पीते रहें।
ढीले और सूती कपड़े पहनें।
खाली पेट बाहर ना जाएं और थोड़ी थोड़ी देर पर पानी पीते रहें।
गर्मी से एकदम ठंडे कमरे में ना जाएं।
दिन में दो बार नहाएं।
हरी सब्जियों का सेवन अधिक करें।
खीरा, ककड़ी, लौकी, तौरी जरूर खाएं।
ठंडे वातानुकूलित कमरे में रहें।
इमली के गूदे को हाथ पैरों पर मलें।
शरीर का तापमान तेज होने पर सिर पर ठंडी पट्टी रखें।
घर से बाहर निकलते समय जेब में कटा प्याज रखें।

मधुमेह के लिए घरेलू उपचार*

1. औसत आकार का एक टमाटर, एक खीरा और एक करेला को लीजिए। इन तीनों को मिलाकर जूस निकाल लीजिए। इस जूस को हर रोज सुबह-सुबह खाली पेट लीजिए। इससे डायबिटीज में फायदा होता है।
2. डायबिटीज के मरीजों के लिए सौंफ बहुत फायदेमंद होता है। सौंफ खाने से डायबिटीज नियंत्रण में रहता है। हर रोज खाने के बाद सौंफ खाना चाहिए।
3. मधुमेह के रोगियों को जामुन खाना चाहिए। काले जामुन डायबिटीज के मरीजों के लिए अचूक औषधि मानी जाती है। जामुन को काले नमक के साथ खाने से खून में शुगर की मात्रा नियंत्रित होती है।
4. स्टीविया का पौधा मधुमेह रोगियों के लिए बहुत फायदेमंद होता है। स्टीविया बहुत मीठा होता है लेकिन शुगर फ्री होता है। स्टीविया खाने से पैंक्रियाज से इंसुलिन आसानी से मुक्त होता है।
5. डायबिटीज के मरीजों को शतावर का रस और दूध का सेवन करना चाहिए। शतावर का रस और दूध को एक समान मात्रा में लेकर रात में सोने से पहले मधुमेह के रोगियों को सेवन करना चाहिए। इससे मधुमेह नियंत्रण में रहता है।
6. मधुमेह मरीजो को नियमित रूप से नीम के चार से पांच पत्तो का सेवन करना चाहिए।
7. चार चम्मच आंवले का रस, गुड़मार की पत्ती मिलाकर काढ़ बनाकर पीने मधुमेह नियंत्रण में रहता है।

थाइराइड का सरल और कारगर उपचार : प्याज

1 थायराइड की समस्या आजकल एक गंभीर समस्या बनी हुई है। थायराइड मानव शरीर मे पाए जाने वाले एंडोक्राइन ग्लैंड में से एक है। थाइराइड गर्दन के सामने और स्वर तंत्र के दोनों तरफ होती है। यह थाइराक्सिन नामक हार्मोन बनाती है जिससे शरीर के ऊर्जा क्षय, प्रोटीन उत्पादन एवं अन्य हार्मोन के प्रति होने वाली संवेदनशीलता नियंत्रित होती है। थायराइड तितली के आकार की होती है। थायराइड दो तरह का होता है। हाइपरथायराइडिज्म और हाइपोथायराइड। पुरूषों में आजकल थायराइड की दिक्कत बढ़ती जा रही है। थायराइड में वजन अचानक से बढ़ जाता है या कभी अचानक से कम हो जाता है। इस रोग में काफी दिक्कत होती है।
2 थायराइड को साइलेंट किलर माना जाता है, क्योंकि इसके लक्षण व्यक्ति को धीरे-धीरे पता चलते हैं और जब इस बीमारी का निदान होता है तब तक देर हो चुकी होती है। इम्यून सिस्टम में गड़बड़ी से इसकी शुरुआत होती है लेकिन ज्यादातर चिकित्सक एंटी बॉडी टेस्ट नहीं करते हैं जिससे ऑटो-इम्युनिटी दिखाई देती है।
3 आज कल की भाग दौड़ भरी ज़िन्दगी में ये समस्या आम सी हो गयी हैं, और अलोपथी में इसका कोई इलाज भी नहीं हैं, बस जीवन भर दवाई लेते रहो, और आराम कोई नहीं।
4 जुकाम होना- थाइराइड होने पर आदमी को जुकाम होने लगता है। यह नार्मल जुकाम से अलग होता है और ठीक नहीं होता है।
5 डिप्रेशन- थाइराइड की समस्या होने पर आदमी हमेशा डिप्रेशन में रहने लगता है। उसका किसी भी काम में मन नहीं लगता है, दिमाग की सोचने और समझने की शक्ति कमजोर हो जाती है। याद्दाश्त भी कमजोर हो जाती है।
6 बाल झडऩा- थाइराइड होने पर आदमी के बाल झडऩे लगते हैं तथा गंजापन होने लगता है। साथ ही साथ उसके भौहों के बाल भी झडऩे लगते है।
थायराइड आखिर क्यो होता है क्या कारण हो सकते है।
7 जब तनाव का स्तर बढ़ता है तो इसका सबसे ज्यादा असर हमारी थायरायड ग्रंथि पर पड़ता है। यह ग्रंथि हार्मोन के स्राव को बढ़ा देती है।
8 यदि आप के परिवार में किसी को थायराइड की समस्या है तो आपको थायराइड होने की संभावना ज्यादा रहती है। यह थायराइड का सबसे अहम कारण है।
9 कई बार कुछ दवाओं के प्रतिकूल प्रभाव भी थायराइड की वजह होते हैं।
10 ग्रेव्स रोग थायराइड का सबसे बड़ा कारण है। इसमें थायरायड ग्रंथि से थायरायड हार्मोन का स्राव बहुत अधिक बढ़ जाता है। ग्रेव्स रोग ज्यादातर 20 और 40 की उम्र के बीच की महिलाओं को प्रभावित करता है, क्योंकि ग्रेव्स रोग आनुवंशिक कारकों से संबंधित वंशानुगत विकार है, इसलिए थाइराइड रोग एक ही परिवार में कई लोगों को प्रभावित कर सकता है।
11 थायराइड की समस्या पिट्यूटरी ग्रंथि के कारण भी होती है क्यों कि यह थायरायड ग्रंथि हार्मोन को उत्पादन करने के संकेत नहीं दे पाती।
12 थायरायडिस- यह सिर्फ एक बढ़ा हुआ थायराइड ग्रंथि (घेंघा) है, जिसमें थायराइड हार्मोन बनाने की क्षमता कम हो जाती है।
13 भोजन में आयोडीन की कमी या ज्यादा इस्तेमाल भी थायराइड की समस्या पैदा करता है।
14 इसोफ्लावोन गहन सोया प्रोटीन, कैप्सूल और पाउडर के रूप में सोया उत्पादों का जरूरत से ज्यादा प्रयोग भी थायराइड होने के कारण हो सकते है।
15 सिर, गर्दन और चेस्ट की विकिरण थैरेपी के कारण या टोंसिल्स, लिम्फ नोड्स, थाइमस ग्रंथि की समस्या या मुंहासे के लिए विकिरण उपचार के कारण।
16 रजोनिवृत्ति भी थायराइड का कारण है क्योंकि रजोनिवृत्ति के समय एक महिला में कई प्रकार के हार्मोनल परिवर्तन होते है। जो कई बार थायराइड की वजह बनती है।
17 थायराइड का अगला कारण है गर्भावस्था, जिसमें प्रसवोत्तर अवधि भी शामिल है। गर्भावस्था एक स्त्री के जीवन में ऐसा समय होता है जब उसके पूरे शरीर में बड़े पैमाने पर परिवर्तन होता है, और वह तनाव ग्रस्त रहती है।
थाइराइड का सरल और कारगर उपचार
18 सेंट पीटर्सबर्ग, रूस से एक प्रसिद्ध चिकित्सक ने थायराइड ग्रंथि के विकारों का इलाज खोजने का दावा किया है इस अविश्वसनीय उपाए में सिर्फ एक घरेलु औषधि का उपयोग होता है और वो है लाल प्याज।1 ये उपचार रात को सोने से पहले करना है एक लाल प्याज लेकर उसको दो हिस्सों में काट लें और गर्दन पर ञ्जद्ध4ह्म्शद्बस्र त्रद्यड्डठ्ठस्र के आस पास गोल गोल मसाज करे। मसाज करने के बाद गर्दन को धोएं नहीं रात भर ऐसे ही छोड़ दें और प्याज का रस अपना काम करता रहेगा।
19 ये उपचार बहुत ही आसान है और आप इसे एक बार जरुर आजमा कर देखें आप को अच्छे नतीजे प्राप्त होंगे।

जानिए आखिर क्यूं होता है थायरोड:

1. कई बार तनाव का स्तर इतना बढ़ जाता है कि इसका असर हमारी थायरोड ग्रंथी पर गहरा असर पड़ता है और इस कारण थायरोड का स्तर बढ़ जाता है ।

2. कई बार यदि परिवार में किसी को थायरोड है या था तो आगे भी किसी या उनके बच्चों को भी इसकी समस्या हो सकती है।

3. दवाइयों का भी कई बार प्रतिकूल असर हो जाने के कारण भी ये समस्या हो जाती है ।

4. खाने में आयोडीन की कमी के कारण भी ये समस्या हो जाती है ।

5. गर्भवस्था में स्त्री को ये समस्या सबसे ज्यादा होने की आशंका होती हे क्योंकि गर्भवस्था में स्त्री के शरीर में काफी परिवर्तन होते है। जिससे की वह तनाव में आ जाती है और उसे थायरोड होने की समस्या हो सकती है ।

थायरोड को रोकने के उपाय :

1. पानी का सेवन दिन में कम से कम 3 लिटर पानी पिएं इससे आपका थायरोड फंक्शन ठीक रहेगा ।

2. रात को सोते समय थायरोड ग्रंथी के पास प्याज़ का रस लगाएं ऐसा करने से थायरोड की समस्या जड़ से खत्म हो जाएगी ।

3. रोज सुबह खाली पेट एक गिलास दूध में एक चमच नारियल तेल डाल कर पिएं इससे काफी आराम मिलेगा ।

4. अपनी रोजमर्रा जिंदगी में आयोडीन फूड जैसे कि मछली, गाजर,पत्तागोभी को खाएं इससे आपको काफी आराम मिलेगा ।

5. रोज सुबह लोकी का जूस खाली पेट पीने से थायरोड जड़ से खत्म हो जाएगा ।

6. हर रोज दिन में दो बार एलोविरा तथा तुलसी का मिक्स जूस पीने से ये समस्या जड़ से ख़त्म होगी ।

7. रोज हल्दी वाला दूध पीने से भी काफी असर होगा ।

8. रोज चाय में थोड़ी सी काली मिर्च तथा सोंठ डालने से थायरोड की समस्या दूर होगी ।

9. रोज रात या सुबह खाली पेट नींबू और पालक का जूस पीने से भी थायरोड की समस्या जड़ से खत्म होगी ।

Skin problems
*रक्त विकृति कारण और निवारण*:—-:-

खाज-खुजली के साथ त्वचा के अनेक रोगों की उत्पत्ति होती है और फोड़े-फुंसियां तेजी से निकलते है शरीर के विभिन्न अंगों में सूजन, मुहांसों की उत्पत्ति भी दूषित रक्त के कारण ही होती है।
उपचार:-आंवले की गुठली को जला कर उसकी भस्म बना लें।इस भस्म में नारियल का तेल मिलाकर शरीर पर मलने से खुजली नष्ट होती है।
2.शरीर पर फोड़े-फुंसियां उत्पन्न होने पर नीम की छाल जल के साथ घिसकर लगाने से बहुत लाभ होता है।नीम की पत्तियों को पानी में उबालकर पानी को छानकर फोड़े- फुंसियों को धोने पर बहुत लाभ होता है।
3.रात्रि में सोने से पहले 5ग्राम त्रिफला चूर्ण हल्के गर्म जल के साथ सेवन करने से कब्ज नष्ट होने पर रक्त शुद्ध होता है।
4.अजवायन को गर्म जल में पीस-कर शरीर पर मलने से खुजली नष्ट होती है।
5.सुबह-शाम आलू का 20 ग्राम रस पीने से रक्त शुद्ध होने पर फोड़े -फुंसियां नष्ट होती है।

दिल की बीमारियों के घरेलू उपचार:—-👇

*कच्चा लहसुन रोज सुबह खाली पेट छील कर खाने से खून का संचार ठीक रहता है और दिल को मजबूत बनाता है,इससे कोलेस्ट्रॉल भी कम होता है।

*सेब का जूस और आंवले का मुरब्बा खाने से दिल बेहतर ढंग से काम करता है।

*शहद दिल को मजबूत बनाता है। इसलिए एक चम्मच शहद प्रतिदिन अवश्य ही लें।

*रोज 50 ग्राम कच्चा ग्वारपाठा खाली पेट खाने से भी कोलेस्ट्रॉल कम हो जाता है।

*लौकी उबालकर उसमें धनिया, जीरा व हल्दी का चूर्ण तथा हरा धनिया डालकर कुछ देर पकाकर इस सप्ताह में कम से कम 2-3 बार खाइए। इससे दिल को शक्ति मिलती है।

*अनार के रस में में मिश्री मिलाकर हर रोज सुबह-शाम पीने से दिल मजबूत होता है।

*बादाम खाने से दिल सेहतमंद रहता है क्योंकि इसमें विटामिन और फाइबर भरपूर मात्रा में होता है।

*अर्जुन छाल और प्याज को बराबर पीस कर समान मात्रा में तैयार कर प्रतिदिन आधा चम्मच दूध के साथ लेने से हृदय रोगों में बहुत ही लाभ मिलता है।

*खाने में अलसी के तेल का प्रयोग करें । अलसी में ओमेगा-3 फैटी एसिड भरपूर मात्रा में होता है जिससे भी दिल मजबूत होता है ।

*छोटी इलायची और पीपरामूल का चूर्ण घी के साथ खाने से भी दिल मजबूत रहता है।

*दिल को मजबूत बनाने के लिए गुड को देसी घी में मिलाकर नित्य खाने से भी बहुत फायदा होता है।

*गाजर के रस को शहद में मिलाकर पीने से भी दिल मजबूत होता है।

*अलसी के पत्ते और सूखे धनिए का काढ़ा बनाकर पीने से भी ह्रदय की कमजोरी मिटती है।

चमत्कारी फेस पैक बनाने के तरीके

तैलीय और रूखी त्वतचा के लिए अलग-अलग फेस पैक का इस्ते माल कीजिए। इसके अलावा चेहरे और शरीर के लिए हर्बल तेल और उबटन का प्रयोग कर सकते हैं।
कड़वी नीम की पत्तीक लगभग 100 ग्राम और 1 या 2 लौंग ले लीजिए। नीम की पत्तियों को पीसकर रस निकाल लीजिए, इसमें एक लौंग डालकर फ्रिज में रख दीजिए। सुबह-शाम इस मिश्रण से चेहरे को साफ कीजिए। एक्नेप और पिंपल्सी के लिए यह घोल बहुत ही फायदेमंद है। तैलीय त्वसचा के लिए इस घोल का प्रयोग कीजिए।

मसूर की दाल 50 ग्राम, चंदन पाउडर 50 ग्राम, चुटकी भर हल्दीस, 25 ग्राम गुलाब की पत्तियां, दो पिसी हुई लौंग, एक टिकिया कपूर लेकर सबको एक साथ मिलाकर रख लीजिए। यह पैक रूखी और तैलीय दोनों प्रकार की त्वकचा के लिए फायदेमंद है। अगर चेहरे पर पिंपल्सक है तो नीम का रस भी मिला लीजिए।

मुल्तानी मिट्टी आधा कप, संतरे के छिलके का पावडर आधा कप, सफेद चंदन चार बड़े चम्मफच, इन सभी सामग्रियों को मिलाकर बोतल में भरकर रख दीजिए। इस घोल में दूध, पानी या दही कुछ भी मिलाकर पेस्ट बनाइए और इस पेस्ट को आधा घंटा चेहरे पर लगाए रहने दें। उसके बाद रगड़कर इसे साफ कीजिए। चिकनी, चिपचिपी त्वचा के लिए यह बहुत फायदेमंद है। इसे सप्ताह में दो बार इस्तेमाल करने से कील, मुहाँसे, ब्लैक हैड्स सभी दूर होते हैं और त्वुचा की रंगत भी साफ होती है।

ककड़ी का रस 2 चम्मच, गुलाब जल 2 चम्मच इन दोनों को मिला लीजिए। चेहरे पर हल्केक हाथों से इस घोल को लगाइए। कुछ देर बाद साफ पानी से धुल लीजिए। इसे तैयार करके एक सप्ताह के लिए रख सकते हैं। यह मिश्रण आँखों के काले घेरे दूर करता है वह धूप में झुलसी त्वचा के लिए कारगार साबित होता है। चिकनी त्वचा के लिए नींबू का रस लगा सकते हैं और अधिक रूखी त्वचा के लिए नींबू के रस में शहद मिलाकर लगाने से त्व्चा में नमी बनी रहेगी और चेहरा खिलेगा।

खर्राटा :-

घरेलू उपाय
2 हल्दी का इस्तेमाल
3 ऑलिव ऑयल
4 इलायची
5 पुदीने का तेल
6 लहसुन
खर्राटे लेने की समस्या आजकल इतनी सामान्य हो गई है कि लोगों ने इसे अब बीमारी समझना ही छोड़ दिया गया है। खर्राटे लेने वाले को भले ही कुछ पता न चलें लेकिन उसके साथ सोने वाले की तो नींद खराब होती ही है। जीं हां नींद में खर्राटे लेने की आदत से आप न केवल अपने साथी की नाराजगी का शिकार हो सकते हैं, वरन इससे आपके शरीर पर अन्य बहुत से दुष्प्रभाव भी पड़ते हैं। इससे आपकी देखने की क्षमता पर बुरा असर पड़ने के साथ ही इसका सीधा संबंध दिल से जुड़ी कई बीमारियों से भी है। इसलिए अगर यह समस्या बहुत बढ़ गई है तो खर्राटे वाले को तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। हालांकि खर्राटे की समस्या को प्रारंभिक अवस्था में घरेलू उपायों की मदद से पूरी तरह से दूर किया जा सकता है। आइए खर्राटे को दूर करने के घरेलू उपायों की जानकारी लेते हैं।
हल्दी में एंटी-सेप्टिक और एंटी-बायोटिक गुणों के कारण, इसके इस्तेमाल से नाक का रास्ता साफ हो जाता है जिससे सांस लेना आसान हो जाता है। रात को सोने से पहले रोजाना हल्दी का दूध पीने से खर्राटों की समस्या से बचा जा सकता है।
ऑलिव ऑयल एक बहुत ही कारगर घरेलू उपाय है। इसमें भरपूर मात्रा में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण की मौजूदगी श्वसन तंत्र की प्रक्रिया को सुचारू बनाए रखने में बहुत फायदेमंद होती है। साथ ही यह दर्द को कम करने में मदद करता है। एक आधा छोटी चम्मच ऑलिव ऑयल में सामान मात्रा में शहद मिलाकर, सोने से पहले नियमित रूप से लें। गले में कंपन को कम करने और खर्राटों को रोकने के लिए नियमित रूप से इस उपाय का प्रयोग करें।
इलायची सर्दी खांसी की दवा के रूप में काम करती हैं। यानी यह श्वसन तंत्र खोलने का काम करती है। इससे सांस लेने की प्रक्रिया सुगम होती है। रात को सोने से पहले इलायची के कुछ दानों को गुनगुने पानी के साथ मिलाकर पीने से समस्या से राहत मिलती है। सोने से पहले इस उपाय को कम से कम 30 मिनट पहले करें।
पुदीने में कई ऐसे तत्व मौजूद होते हैं जो गले और नाक के छिद्रों की सूजन को कम करने का काम करते हैं। इससे सांस लेना आसान हो जाता है। सोने से पहले पिपरमिंट ऑयल की कुछ बूंदों को पानी में डालकर उससे गरारे करें। इस उपाय को कुछ दिन तक करने से आपको जल्द ही फर्क दिखाई देने लगेगा।
लहसुन, नासिका मार्ग में बलगम के निर्माण और श्वसन प्रणाली में सूजन को कम करने में मदद करता है। अगर आप साइनस रुकावट के कारण खर्राटे लेते हैं तो, लहसुन आपको राहत प्रदान करता है। लहसुन में हीलिंग गुण होते है। जो ब्लॉकेज को साफ करने के साथ ही श्वसन-तंत्र को भी बेहतर बनाते है। अच्छी और चैन की नींद के लिए लहसुन का इस्तेमाल बहुत फायदेमंद है। एक या दो लहसुन की कली को पानी के साथ लें। इस उपाय को सोने से पहले करने से आप खर्राटों से राहत पा चैन की नींद ले सकते हैं

काली मिर्च के लाभ

काली मिर्च एक अनुपम औषधि है। लाल मिर्च की अपेक्षा यह कम दाहक और अधिक गुणकारी है। इसीलिए मसाले में लाल मिर्च की बजाय काली मिर्च का उपयोग प्रचलित है। काली मिर्च का योग्य रीति से उपयोग किया जाए तो वह रसायन गुण देती है। आयुर्वेद में काली मिर्च को सभी प्रकार के बैक्टीरिया, वायरस आदि का नाश करने वाली औषधि माना जाता है।
काली मिर्च खाने का स्वाद तो बढ़ाता तो है ही साथ ही इसे खाने स पेट में हाइड्रोक्लोरिक एसिड तेजी से बढ़ता है जिससे पाचन सही रहता है। इसमें कई तरह के एंटीबैक्टीरिया होते हैं जो आंतों में होने वाले इंफेक्शन को ठीक करता है।
*👉🏻जुकाम की वजह से अगर गला खराब होतो और गले में जकड़न होतो काली मिर्च का काढ़ा बहुत फायदा करता है।
*👉🏻जुकाम होने पर काली मिर्च मिलाकर गर्म दूध पीएं। यदि जुकाम बार-बार होता है, अक्सर छीकें आती हैं तो काली मिर्च की संख्या एक से शुरू करके रोज एक बढ़ाते हुए पंद्रह तक ले जाए फिर प्रतिदिन एक घटाते हुए पंद्रह से एक पर आएं। इस तरह जुकाम एक माह में समाप्त हो जाएगा।
👉🏻*गला बैठना : काली मिर्च को घी और मिश्री के साथ मिलाकर चाटने से बंद गला खुल जाता है और आवाज़ सुरीली हो जाती है। आठ-दस काली मिर्च पानी में उबालकर इस पानी से गरारे करें, इससे गले का संक्रमण खत्म हो जाएगा।
*👉🏻त्वचा रोग : काली मिर्च को घी में बारीक पीसकर लेप करने से दाद-फोड़ा, फुंसी आदि रोग दूर हो जाते हैं।
👉🏻*सर्दी, जुकाम-खांसी होने पर 8-10 काली मिर्च, 10-15 तुलसी के पत्ते मिलाकर चाय बनाकर पीने से आराम मिलता है।
*👉🏻खांसी में काली मिर्च, पीपल और सोंठ बराबर मात्रा में पीस लें। तैयार 2 ग्राम चूर्ण शहद के साथ दिन में 2-3 बार चटाएं।
*👉🏻4-5 काली मिर्च करीब 15 दाने किशमिश के साथ खाना खांसी में लाभकारी है।
*👉🏻100 ग्राम गुड़ पिघला कर 20 ग्राम काली मिर्च का पाउडर मिलाएं। थोड़ा ठंडा होने पर उसकी छोटी-छोटी गोलियां बना लें। खाना खाने के बाद 2-2 गोलियां खाने से आराम मिलता है।
👉🏻*खांसी होने पर आधा चम्मच काली मिर्च का चूर्ण और आधा चम्मच शहद मिलाकर दिन में 3-4 बार चाटें। खांसी दूर हो जाएगी
*👉🏻काली मिर्च दांतों और मसूड़ों के दर्द को भी सही करता है। काली मिर्च के साथ नमक को मिलाकर उसका पेस्ट बनाएं और दांतो और मसूड़ों पर लगाएं, दर्द कम हो जाएगा|
पेट में होने वाली गेस को कम करती है कालीमिर्च।
*👉🏻काली मिर्च उन लोगों के लिए बहुत कारगर है जो वजन घटाना चाहते हैं। काली मिर्च में कुछ ऐसे तत्व होते हैं जो वजन बढ़ाने वाले सेल्स को कम करता है।
*👉🏻खांसी में काली मिर्च को गर्म दूध में मिलाकर सेवन करना फायदेमंद है।
👉🏻*सूखी खांसी होने पर 15-20 ग्राम देसी घी में 4-5 काली मिर्च लेकर एक कटोरी में गर्म करें। जब काली मिर्च कड़कड़ाने लगे और ऊपर आ जाए, तब उतार कर थोड़ा ठंडा करें। फिर इसमें 20ग्राम पिसी मिश्री मिलाएं। काली मिर्च चबाकर खा लें। इसके एक घंटे बाद तक कुछ खाएं नहीं। यह प्रक्रिया 2-3 दिन दोहराएं।
*👉🏻2 चम्मच दही, एक चम्मच चीनी और 6 ग्राम पिसी काली मिर्च मिलाकर चाटने से काली और सूखी खांसी में आराम मिलता है।
👉🏻*एक चम्मच शहद में 2-3 पिसी काली मिर्च और चुटकी भर हल्दी मिलाकर खाने से जुकाम में बनने वाले कफ से राहत मिलेगी।
*👉🏻कब्ज होने पर 4-5 काली मिर्च के दाने दूध के साथ रात में लेने से आराम मिलता है।
*👉🏻उल्टी-दस्त होने पर काली मिर्च, हींग और कपूर प्रत्येक 5 ग्राम मिलाएं। छोटी-छोटी गोलियां बना लें। इन्हें हर 3 घंटे बाद सेवन करें।
*👉🏻बदहजमी होने पर कटे नींबू के आधे टुकड़े के बीज निकाल कर काली मिर्च और काला नमक भरें। इसे तवे पर थोडा गर्म करके चूसें।
*👉🏻काली मिर्च आंखों के लिए उपयोगी है। भुने आटे में देसी घी, काली मिर्च और चीनी मिला कर मिश्रण बनाएं। सुबह-शाम 5 चम्मच मिश्रण का सेवन करें।
👉🏻*नमक के साथ काली मिर्च मिलाकर दांतों में मंजन करने से पायरिया ठीक होता है, दांतों में चमक आती है।
👉🏻नाक बंद हो तो छोटे-से सूती कपड़े में दालचीनी, काली मिर्च, इलायची और जीरे की बराबर मात्रा में पोटली बांध लें। इन्हें सूंघने से नाक खुल जाएगी।

*अनुभूत घरेलू नुस्खे*:——-

फटी एड़ियों के लिए रात में सोने से पहले पेट्रोलियम जैली के साथ नारियल तेल की मालिश करें। सुबह गुनगुने पानी से पैर धो लें।

एक गिलास दूध में बिना शकर डाले शहद घोलकर रात को पीने से दुबलापन दूर होकर शरीर सुडौल, पुष्ट व बलशाली बनता है।

मुँह में छाले होने पर नारियल खाना चाहिए। इससे छाले जल्‍दी ठीक हो जाते हैं।

सोने से पहले चाय व काफी न पियें इससे मस्तिष्क की शिरायें उत्तेजित हो जाती हैं और गहरी नींद में बाधक होती है।

कान का दर्द सताए तो एक चम्मच तिल के तेल में लौंग डालकर इसे गरम कर लें। कान में इस तेल की चार-पाँच बूँद टपकाने से कान का दर्द मिट जाता है।

सिर दर्द होने पर गुनगुने पानी में अदरक व नीबू का रस व थोड़ा सा नमक मिलाकर पीने से आराम मिलता है।

सरसों के तेल में अजवायन डालकर अच्छी तरह गरम करें। इससे जोड़ों की मालिश करने पर जोड़ों के दर्द में आराम होता है।

मधुमेह – मधुमेह के रोगी जिनके लिए मिठाई, चीनी इत्यादि वर्जित है, सीमित मात्रा में खजूर का इस्तेमाल कर सकते हैं। खजूर में वह अवगुण नहीं है, जो गन्ने वाली चीनी में पाए जाते हैं।

गुलाब के नाम पर न जाने कितनी कविताएं पढ़ी होंगी आपने। गुलाब के रंग-बिरंगे फूल सिर्फ ड्रॉइंगरूम में फूलदान पर ही अच्छे नहीं लगते, बल्कि इसकी पंखुड़ियां भी बड़े काम की हैं। गुलाब जल का इस्तेमाल फेस मास्क में भी होता है और यह खाने को भी लज्जतदार बनाता है। गुलाब विटामिन ए, बी 3, सी, डी और ई से भरपूर है। इसके अलावा इसमें कैल्शियम, जिंक और आयरन की भी मात्र काफी होती है।

गर्मियों में ऐसे गोरा करे अपनी त्वचा

आज हम आपको एक ऐसे पौधे के बारे में बताने जा रहे है जो आपको आसानी सी मिल भी जाएगा और आप उसको भली भाति जानते भी होंगें जी हम बात कर रहे है पुदीने की साधारण-सा दिखने वाला ये पौधा बहुत शक्तिशाली और चमत्कारी प्रभाव रखता है. इसमें मौजूद फाइबर आपके कॉलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करते हैं और इसमें मौजूद मैग्नीशियम हड्डियों को ताकत देता है और इन्हें मजबूत बनाता है. पुदीना अच्छा एंटीबायटिक होने के साथ ही आपकी त्वचा को भी बेमिसाल बनाता है. आज आपको बताते हैं पुदीने के फायदे
कील-मुंहासों दूर करता है
पुदीने की पत्तियों में सैलीसिलिक एसिड पाया जाता है, जो कील-मुंहासों और उनसे होने वाले दाग-धब्बों को दूर करने में मदद करता है. इसके लिए पुदीने की पत्त‍ियों में गुलाब जल मिलाकर पेस्ट की तरह पीस लें और इसे चेहरे पर लगाएं. कुछ ही दिनों में आपको अपनी त्वचा में फर्क नजर आने लगेगा. आप चाहे तो पुदीने की पत्तियों के पेस्ट में मुल्तानी मिट्टी मिलाकर भी मुंहासों पर लगा सकते हैं.
त्वचा की रंगत निखारता है
बदलते मौसम की वजह से त्वचा का रूखा होना स्वाभाविक है. इस रूखेपन से बचने के लिए रोज के खाने में पुदीना शामिल करें. इससे भरपूर एंटीऑक्सीडेंट मिलेगा और त्वचा का निखार बरकरार रहेगा. इसके अलावा पुदीना न केवल त्वचा की सफाई करने के काम आता है बल्क‍ि इसके नियमित इस्तेमाल से त्वचा की रंगत भी निखरती है. त्‍वचा में निखार लाने के लिए पुदीने की पत्तियों के पेस्ट या फिर इसके रस को नियमित रूप से चेहरे पर लगाएं.
पुदीना अपनी ठंडी तासीर के लिए जाना जाता है. खीरे की तरह ही पुदीना भी त्‍वचा को मॉश्‍चराइज करने के काम आता है. पुदीने की पत्तियों के रस को चेहरे पर लगाने से त्‍वचा को ताजगी और नमी मिलती है. साथ ही पुदीने के रस से त्‍वचा के पोर्स भी खुलते हैं. पुदीने की पत्तियों के रस को दही या शहद के साथ मिलाकर लगाना बहुत फायदेमंद होता है.
दाग-धब्बों से दिलाता है मुक्ति
बढ़ती उम्र का असर चेहरे पर भी दिखाई देता है. जैसै-जैसे उम्र बढ़ती है, त्वचा पर दाग-धब्बे उभरने लग जाते हैं. पुदीने की पत्तियों का पेस्ट बनाकर उसे चेहरे पर लगाने से ये दाग-धब्बे दूर होते हैं. कुछ ही समय बाद आपको इसका फर्क दिखाई देने लगेगा. इसके अलावा यह पिग्मेंटेशन की समस्या को भी दूर करने का काम करता है.

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