Chikitsa Sansar Parmarthik Trust (Reg.)

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‘Chikitsa Sansar Parmarthik, Sanskrutik Trust’

  सुख, समृद्धि और विकास की राह पर:- मनुष्य के जीवन में अनेक उतार-चढ़ाव आते है, किंतु हर व्यक्ति चाहता है सुख, समृद्धि और विकास।
इन तीनों के मूल आधार से जुड़ें है शिक्षा और स्वास्थ्य।
आज हम विकास के दौर में अनेक समस्याओं से गुजर रहे है और ये समस्याएँ तनाव के रूप में हमारे जीवन की खुशियों को हमसे कोसों दूर कर रही है।
इन्ही मूल बिंदुओं को ध्यान में रखकर जन-जागृति लाने की कोशिश है, “चिकित्सा परमार्थिक चेरिटेबल ट्रस्ट” का गठन।
स्वास्थ्य के क्षेत्र में कैंसर, मधुमेह, हृदय रोग और मोटापा एक बड़ी समस्या बनकर उभरे है, और इनके कारणों की मूल है – हमारी कार्यशैली और जीवनशैली में बदलाव।
स्वास्थ्य एवं शिक्षा –
बीमारियाँ अपना स्वरूप बदल सकती है किंतु जीवन अमूल्य है इस हेतु दुखियों और पीडि़तों के लिये निरंतर अनुसंधान, कार्य एवं आधारभूत सेवाओं, सुविधाओं का विकास एवं शिक्षा का इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार करना ट्रस्ट का मूल उद्देश्य है।
सामाजिक क्षेत्र –
समाज हमारे जीवन जीने, खुशियों को सहेजने, बाँटने एवं सेलीब्रेट करने का माध्यम है। एक मनुष्य बचपन से लगाकर वृद्धावस्था के दौर में अनेक अलग अनुभवों के साथ गुजरता है उसमें सामंजस्य स्थापित कर सहेज कर भारतीय आदर्श को गौरव दिलाना हम सबकी नैतिक जिम्मेदारी है और यही खुशियों का मार्ग है।
सांस्कृतिक क्षेत्र –
कला क्षेत्र अभिव्यक्ति के साथ जीवन के स्वरूप और आनंददायी जीवन जीने का मार्ग बताता है। भारतीय परिक्षेत्र में हम इस दिशा में लगातार कार्य करते रहेंगे।
आज से नहीं वरन अनादिकाल से हम देखते आये है, कि मन, कर्म एवं वचन से, सत्यता के भाव के साथ ही हर आदर्शदाता की जिम्मेदारी है, कि वह भक्त, निवेदक या याचक को उसकी अपेक्षाओं के अनुरूप सेवा प्रदान करने का कार्य करे।
हम परमपिता परमात्मा से प्रार्थना करते है कि वह भी हमें इतना समर्थ बनाये, कि हम उसके बताये मार्ग

‘‘साँई इतना दीजिये जा मे कुटुंब समाये,

मैं भी भूखा ना रहूँ, साधु न भूखा जाये’’

के दोहे को चरितार्थ कर सके।  सभी से सहयोग एवं आशीर्वाद की अपेक्षा के साथ.

चिकित्सा संसार पारमार्थिक, सांस्कृतिक न्यास उज्जैन (म.प्र.) का न्यास विलेख परमार्थ प्रयोजनार्थ
(जिसमें संपत्ति का आंतरण नहीं है।)
न्यासकर्तागण जिनके द्वारा यह न्यास की घोषणा की जा रही है

श्री अशोक कुमार खण्डेलवाल पिता श्री जगदीश प्रसाद खण्डेलवाल, आयु-52 वर्ष, निवासी-71, साँईनाथ काॅलोनी, अलखधाम नगर उज्जैन (म.प्र.)

श्रीमति प्रमिला खण्डेलवाल पति अशोक कुमार खण्डेलवाल, आयु-50 वर्ष, निवासी-71, साँईनाथ काॅलोनी, अलखधाम नगर उज्जैन (म.प्र.)

-ः न्यास का नाम:- न्यासकर्तागण द्वारा स्थापित व घोषित किये जा रहे इस ट्रस्ट का नाम –

‘‘चिकित्सा संसार पारमार्थिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक न्यास उज्जैन’’ रहेगा।

-ः न्यास का कार्यालय:- 125, कंठाल चैराहा, कोतवाली रोड़, उज्जैन (म.प्र.)

-ः कार्य संचालन:-
न्यासकर्तागण आवश्यकतानुसार उज्जैन में, तथा उज्जैन के बाहर संपूर्ण भारत व भारत के अन्य प्रांतों में मकानों/भूमि की व्यवस्था कर ‘‘चिकित्सा संसार पारमार्थिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक न्यास उज्जैन म. प्र. होंगे।’’ ‘‘समस्त न्यासीगण इस न्यास में उल्लेखित सामाजिक, सांस्कृतिक व शैक्षणिक व चिकित्सीय कार्य निःशुल्क करने हेतु समर्पित रहेंगे। इस प्रकार न्यासकर्तागण ‘‘चिकित्सा संसार पारमार्थिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक न्यास उज्जैन’’ के कार्य हेतु जो संपत्ति पारमार्थिक उद्देश्य से उपलब्ध करेंगे उनमें संपत्ति  का अंतरण सम्मिलित नहीं होगा, केवल ‘‘चिकित्सा संसार पारमार्थिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक न्यास उज्जैन’’ के पारमार्थिक कार्याें के लिये किसी भी स्थान का उपयोग किया जावेगा।
इस ट्रस्ट का मुख्य उद्देश्य, पारमार्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक शिक्षा एवं चिकित्सीय रहेगा। इस उद्देश्य की पूर्ति हेतु जमीन क्रय करना और इस पर भवन निर्माण कराना तथा मानव मात्र की सेवा जिसके अंतर्गत पारमार्थिक, सामाजिक उत्थान के कार्य निःशुल्क करना। निर्माण पश्चात् समस्त चल व अचल संपत्ति की व्यवस्था करना एवं प्रशासन चलाना एवं विभिन्न सांस्कृतिक, सामाजिक, धार्मिक आयोजन लोकहित में करना एवं नागरिकों के स्वास्थ्य एवं शिक्षा एवं चिकित्सीय सुविधा सेवा हेतु हाॅस्पिटल, वृद्धाश्रम, शिक्षण संस्थान, धर्मशाला, बालवाड़ी का संचालन एवं निर्माण करना है।
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 ट्रस्ट के उद्देश्य:-

  1.  इस ट्रस्ट का मुख्य उद्देश्य, पारमार्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक शिक्षा एवं चिकित्सीय रहेगा। इस उद्देश्य की पूर्ति हेतु जमीन क्रय करना और इस पर भवन निर्माण कराना तथा मानव मात्र की सेवा जिसके अंतर्गत पारमार्थिक, धार्मिक, सामाजिक उत्थान के कार्य करना। निर्माण पश्चात् समस्त चल व अचल सम्पत्ति की व्यवस्था करना एवं प्रशासन चलाना एवं विभिन्न सांस्कृतिक, सामाजिक, धार्मिक आयोजन लोकहित में करना एवं नागरिकों के स्वास्थ्य एवं शिक्षा एवं सुविधा सेवा हेतु हाॅस्पिटल व वृद्धाश्रम, शिक्षण संस्थान, धर्मशाला, बालवाडी का संचालन एवं निर्माण करना है।
  2.  कैंसर, एड्स, मधुमेह, थेलीसिमिया, हेपेटाइटिस जैसी जानलेवा बीमारियों के रोकथाम एवं प्रचार प्रसार हेतु कार्य एवं इस हेतु विभिन्न समितियों का गठन कर कार्य करना।
  3.  चिकित्सालय आदि का निर्माण, संचालन एवं विकास करना तथा अन्य सामाजिक व शासकीय संस्थान द्वारा किये जा रहे स्वास्थ्य सेवाओं एवं सेवाकार्यों मंे सहयोग प्रदान करना। चिकित्सा एवं शिक्षा के प्रचार प्रसार हेतु विभिन्न कार्यशालाओं, स्वास्थ्य मेले का आयोजन करना।
  4. चिकित्सा की विभिन्न पद्धतियों जैसे एलोपैथ, होम्योपैथ, आयुर्वेद, योग, नैचरोपैथ, यूनानी, सिद्धा एवं औषधी क्षेत्र फार्मेसी आदि के लिये उनके विकास, ज्ञानार्जन, संवर्धन, अनुसंधान, शिक्षण एवं चिकित्सा सेवाओं के विकास के लिये कार्य करना।
  5. अनुसंधान प्रशिक्षण एवं प्रकाशन के माध्यम से ग्रामीण एवं जनजातीय क्षेत्रों में जागृति के लिये उचित प्राद्योगिकी एवं मृदु सामग्री (साफ्टवेयर) विकसित करना।
  6. आम जनता के सेवार्थ ब्लड़ बैंक एवं क्लबों के विकास हेतु कार्य करना।
  7. मलेरिया, स्वाइन फ्लू, डेंगू, चिकनगुनिया आदि महामारियों जो समय असमय विभिन्न लक्षणों एवं नाम से प्रकट होती है के रोकथाम एवं प्रचार प्रसार के लिये कार्य करना।
  8. स्वास्थ्य सेवा में कार्यरत चिकित्सकगण व अन्य कर्मचारियों के उत्थान के लिये कार्य करना।
  9. विभिन्न चिकित्सा विशेषज्ञों की सेवाओं के द्वारा उनसे संबंधित स्वास्थ्य केम्प व शल्य चिकित्सा केम्प आयोजित करना व ऐसे शिविरों का आयोजन कर प्रचार प्रसार कर जन-जन को लाभांवित करना।
  10. बच्चों के स्वास्थ्य एवं समग्र विकास हेतु स्कूलों एवं गरीब बस्तियों में स्वास्थ्य केम्प एवं निदान कार्यक्रम आयोजित करना।
  11. स्वस्थ समाज के विकास हेतु सफाई एवं शौचालय जैसे निर्माण योजनाओं एवं अनुसंधान पर कार्य करना।
  12. भारतीय संस्कृति एवं सभ्यता के आधार पर प्राथमिक विद्यालय से महाविद्यालय तक स्थापित करना, तकनीकी एवं व्यवसायिक पाठ्यक्रम को संचालन एवं व्यवस्थापन करना और उनके माध्यम से सांस्कृतिक केंद्र, सामाजिक एवं सांस्कृतिक चेतना का प्रसारण करना।
  13. वाचनालयों एवं पुस्तकालयों की स्थापना, उनका संचालन व्यवस्थापन करना।
  14. शिक्षा के क्षेत्र में बढ़ती जा रही निश्चेष्टता समाप्त कर अंतर्राष्ट्रीय दृष्टिकोण से राष्ट्रीय शिक्षा का प्रचार प्रसार कर जीवन की सर्वांगीण उन्नति के प्रयास करना।
  15. पर्यावरण के विकास के लिये संरक्षण संवर्धन के लिये कार्य करना। पर्यावरण के क्षेत्र में जागरूकता के उद्देश्य से प्रशिक्षण कार्यशालाओं का आयोजन एवं विविध संगोष्ठी, प्रतियोगिता व प्रदर्शनी व कैम्प आयोजित करना।
  16. महिलाओं एवं बच्चों के विकास के लिये शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषक आहार चिकित्सा सुविधा आदि का विस्तार करना एवं उन्हें अधिक लाभांवित करना।
  17. गरीब, असहाय, परित्यक्ता, विधवा, विकलांग, निशक्तजन समुदाय के लिये व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्र, रोजगारोन्मुख कार्यक्रम, आश्रम, स्कूल, चिकित्सा सुविधा आदि का संचालन करना।
  18. बालश्रम, छुआछूत, जातपात, बाल विवाह आदि कुरीतियों के खिलाफ समाज में जनजागरूकता के साथ-साथ वैज्ञानिक पद्धतियों के द्वारा प्रचार प्रसार के कार्य करना।
  19. मानवाधिकार, बाल अधिकार, महिला अधिकार के लिये सामाजिक जनचेतना के साथ-साथ पीडि़त व्यक्ति को चिकित्सा सुविधा के साथ कानूनी सहायता मुहैया कराना।
  20. प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, संवर्धन के लिये कार्य करना तथा वानिकी के विकास के लिये जन सहभागिता के लिये सुदूर संवेदी तकनीकी का उपयोग करना साथ ही संसाधन खोज के लिये अनुवेक्षक तकनीकियों का विकास करना।
  21. ग्रामीण एवं नगरीय स्वच्छ पेयजल, स्वच्छ एवं नियोजित विकास के लिये सामूहिक सहभागिता का प्रयास कर जन चेतना का विकास करना।
  22. हस्तकला, शिल्पकला, वास्तुकला, संगीतकला, नृत्यकला, ललितकला इत्यादि के विकास के लिये प्रयास करना एवं भारत की सामाजिक सांस्कृतिक परिवेशों को ध्यान में रखकर विकासों के माध्यम से ढूंढने का प्रयास करना।
  23. ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन को रोकने का प्रयास करना साथ ही रोजगार को ग्रामीण क्षेत्र में ज्यादा से ज्यादा अवसर प्रदान करने के कार्यक्रमों को प्रोत्साहित कर संचालित करना।
  24. स्वास्थ्य एवं शिक्षा, पत्रकारिता एवं प्रकाशन से जुड़े व्यक्तियों के अधिकार और कर्तव्यों के लिये कार्य एवं उनके कल्याणार्थ कोषालय की स्थापना एवं संचालन व उनकी दैनिक समस्याओं के निदान हेतु प्रयत्नशील रहना।
  25. निर्बल पिछड़े वर्ग आदिवासी, वनवासी, सामान्य वर्ग की महिलाओं एवं बच्चों के लिये केंद्र एवं राज्य की सरकारी एवं अर्द्ध शासकीय योजनाओं से अवगत कराना एवं उनका लाभ संबंधित तक पहुंचाना सुनिश्चित करना।
  26. स्वास्थ्य एवं शिक्षा सेवाओं की जानकारी एवं उनके विकास हेतु अखिल भारतीय स्तर पर केेंद्र की स्थापना एवं सेवाओं के लिये प्रांतीय जिला एवं स्थानीय स्तर पर ऐसे केंद्रो संस्थाओं शाखाओं का विकास जिससे जन-जन का कल्याण हो।
  27. न्यास के कार्यक्रमों को मूर्त रूप प्रदान करने हेतु हिन्दी तथा अन्य भारतीय भाषाओं में प्रकाशन प्रचार प्रसार सामग्री तैयार करना एवं इस हेतु विभिन्न प्रतिनिधि आदि की नियुक्ति करना, गोलमेज कार्यक्रम, विचार गोष्ठियाँ, संवाद परिसंवाद, परिचर्चा, सत्र, व्याख्यानमालाओं का आयोजन, पत्र पत्रिकाओं एवं स्मारिकाओं का प्रकाशन, साहित्य प्रकाशन, देश-विदेश दर्शन आदि का आयोजन करना।
  28. पर्यटन एवं विकास संदर्भित योजनाओं, प्रयोजनों में सक्रिय रूप से कार्य एवं सहयोग करना।
  29. स्वास्थ्य, शिक्षा, कला, संस्कृति, सामाजिक एवं जनविकास के कार्य कर रहे व्यक्तियों, समूह, संस्थानों के प्रोत्साहन हेतु विभिन्न प्रोत्साहन, सम्मान समारोहों का आयोजन करना एवं विभिन्न पुरस्कार प्रदान करना।
  30. प्राकृतिक एवं आकस्मिक आपदाओं के वक्त पीडि़त व्यक्तियों के लिये सेवा, चिकित्सा सेवा एवं पुनर्वास जैसे कार्य करना या उन कार्याें में कार्यरत लोगों, संस्थानों एवं स्थानीय प्रशासन आदि को सहयोग करना।
  31. चिकित्सा सेवा हेतु प्रयुक्त होने वाली विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों में विभिन्न औषधियों के संवर्धन, विकास, शोध के लिये कार्य एवं इस हेतु आवश्यकता पड़ने पर प्रोसेसिंग निर्माण एवं जनकल्याण हेतु वितरण का इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार कर जन-जन तक पहुंचाना एवं जरूरत पड़ने पर शासन प्रशासन की इस दिशा में मदद करना।
  32. औषधि निर्माण एवं वितरण में लगे व्यक्तियों को अपग्रेड करने, उनके शिक्षा एवं सेवाओं के विकास हेतु कार्य करना एवं इस हेतु सेमिनारों कार्यशालाओं का आयोजन करना।
  33. न्यासकर्तागण इस न्यास ‘‘चिकित्सा संसार पारमार्थिक सांस्कृतिक एवं सामाजिक न्यास उज्जैन म. प्र.’’ की कोई भी शाखा या कार्यालय संपूर्ण भारत में कहीं पर भी प्रांतीय/स्थानीय स्तर पर खोल संकेगे व शाखा/कार्यालय के संचालन हेतु पृथक से समिति का निर्माण साधारण सभा में पारित कर किया जा सकेगा।
  34. न्यास का एकमात्र उद्देश्य पारमार्थिक है। न्यास कीसम्पत्ति या न्यास के धन को व्यक्तिगत हित में उपयोग करने का अधिकार किसी भी न्यासी या किसी भी सदस्य/आजीवन सदस्य/संरक्षक सदस्य/साधारण सदस्य को नहीं होगा। न्यास की या न्यास के नाम से कोई सम्पत्ति क्रय की जावे तो उस सम्पत्ति को बेचने का अथवा बंधक रखने का या बदलने का कोई अधिकार न्यासीगण को नहीं होगा। कोई भी न्यासी अगर न्यास के हितों के अनुकूल कार्य नहीं करेगा तो अन्य न्यासियों की सहमति से हटाया जा सकेगा और उसके स्थान पर नवीन न्यासी का सहयोजन किया जा सकेगा।
  35. यह कि न्यास का सत्र तीन वर्षाें का होगा जो 1 अप्रैल से 31 मार्च तक का रहेगा तथा सत्र की समाप्ति पर न्यास के हिसाब का आॅडिट चार्टर्ड एकाउंटेंट से छः माह की अवधि में आॅडिट करा कर न्यास बोर्ड की वार्षिक साधारण सभा में अध्यक्ष/सचिव को प्रस्तुत करना होगा व पास कराना होगा व नवीन कार्यकारिणी के अध्यक्ष/सचिव को आगामी आयंदा साल का सत्र का बजट पास करवाना होगा।

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सदस्यों के अधिकार एवं दायित्व:-

  1. ट्रस्ट का सदस्य ट्रस्ट की विभिन्न सेवा गतिविधियों में भाग ले सकेगा।
  2. ट्रस्ट की बैठकों में आमंत्रित करने पर आमंत्रित सदस्य के रूप में उपस्थित रह सकेगा।
  3. ट्रस्ट के विभिन्न कार्यों में समय-समय पर दिये गये दायित्वों/ कार्यों का निर्वहन कर सकेगा।
  4. ट्रस्ट के हितार्थ आमजन के बीच ट्रस्ट की योजनाओं एवं उद्देश्यों को पूरा करने एवं लाने में जिम्मेदारी में सहयोग देगा।
  5. ट्रस्ट के लिये विभिन्न क्षेत्रों/स्थानों पर ट्रस्ट की शाखाओं संस्थानों का विकास कर सकेगा।

-ः ट्रस्ट्रीयों की अयोग्यता:-

निम्नांकित परिस्थिति में इस ट्रस्ट में ट्रस्टी के रूप में कार्य करने का कोई अधिकार नहीं रहेगा व उस ट्रस्टी के स्थान पर नवीन न्यासी नियुक्त करने का अधिकार होगा।

  1. आपत्ति हो जाने पर उनके कार्य अथवा व्यवहार से संतुष्टि नहीं होने पर।
  2. पागल हो जाने पर।
  3. किसी सक्षम न्यायालय द्वारा दिवालिया घोषित हो जाने पर।
  4. किसी आपराधिक प्रकरण में सिद्धदोष अपराधी पाये जाने पर।
  5. किसी भी ट्रस्टी की गतिविधियों को इस ट्रस्ट के हित में प्रतिष्ठा एवं गरिमा के विपरीत होने पर अन्य ट्रस्टी पद से हटा सकेंगे।
  6.  ट्रस्टी की मृत्यु हो जाने पर या नियमों में परिवर्तन से या दीगर किन्हीं कारणों से ट्रस्टीयों को वर्णित नियमों के अनुसार कार्य करने में किसी प्रकार की कठिनाई होती है 2/3 के बहुमत से इन नियमों के परिवर्तन, परिवर्द्धन या बदलने का पूर्ण अधिकार होगा।.

How to Become a Member of Trust . सदस्यता की प्राप्ति:-
प्रत्येक व्यक्ति जो कि न्यास का सदस्य बनने का इच्छुक हो, को लिखित रूप से आवेदन करना होगा। ऐसा आवेदन पत्र प्रबंध कार्यकारिणी समिति को प्रस्तुत होगा, जिसे आवेदन पत्र को स्वीकार करने या अमान्य करने का अधिकार रहेगा।

न्यास के निम्नांकित श्रेणी के सदस्य होंगे:-

(अ) संरक्षण सदस्य:-

  • संस्था को जो व्यक्ति दान के रूप में रूपये 5,00,000/- या अधिक एक मुश्त या तीन में किश्तों में देगा, वह न्यास का संरक्षक सदस्य होगा।

(ब) आजीवन सदस्य:-

  • जो व्यक्ति संस्था के दान के रूप में रूपये 2,50,000/- या अधिक देकर वह आजीवन सदस्य बन सकेगा।
  • कोई भी आजीवन सदस्य रूपये 5,00,000/- या अधिक देकर संरक्षक सदस्य बन सकता है।

(स) साधारण सदस्य:-

  • जो व्यक्ति रूपये 10000/- प्रति संस्था को चन्दे के रूप में एक मुश्त या छः किश्तों में देगा, वह साधारण सदस्य होगा।
  • साधारण सदस्य केवल दो वर्ष अवधि के लिये सदस्य होगा जिस वर्ष के लिये उसने चन्दा दिया है, उस वर्ष एवं आगामी वर्ष के लिये साधारण सदस्य होगा|
  •  जिन साधारण सदस्यों का बिना संतोषजनक कारणों के, छः माह तक चन्दा देय नहीं होगा, उसकी सदस्यता समाप्त हो जायेगी। ऐेसे सदस्य द्वारा संस्था के लिये नया आवेदन पत्र देने तथा बकाया चन्दे की राशि देने पर पुनः सदस्य बनाया जा सकेगा।

(द) सम्माननीय सदस्य:-

  • संस्था की प्रबंधकारणी किसी व्यक्ति या व्यक्तियों को उस समय के लिये जो भी वह उचित समझे सम्माननीय सदस्य बना सकती है।
  • ऐसे सदस्य साधारण सभा की बैठक में भाग ले सकते है, परंतु उनको मत देने का अधिकार नहीं होगा।

संरक्षक सदस्य/आजीवन सदस्य/ साधारण सदस्य यदि न्यास की चार मीटिंगों में उपस्थित नहीं होवेंगे तो उनको अन्य ट्रस्टियों की सहमति से प्रस्ताव पारित कर हटाया जा सकेगा।

(अ) साधारण सभा:-

  • साधारण सभा में संरक्षक सदस्य, आजीवन सदस्य, साधारण सदस्य श्रेणी के सदस्य समावेशित होंगे।
  • साधारण सभा की बैठक आवश्यकतानुसार हुआ करेगी, परन्तु वर्ष में एक बार बैठक अनिवार्य होगी।
  • बैठक का माह तथा बैठक का स्थान व समय कार्यकारिणी समिति निश्चित कर 15 दिवस पूर्व प्रत्येक सदस्य को दी जावेगी।
  • बैठक की सूचना आधुनिक संचार साधन ई-मेल, मोबाईल मैसेज, फेस-बुक आदि से दी जावेगी व ई-मेल व मोबाईल मैसेज डिलेवरी रिपोर्ट बैठक की सूचना प्रसारित हो गई समझा जावेगा।
  • बैठक का कोरम 2/3 सदस्यों का होगा।
  • संस्था की प्रथम आम सभा पंजीयन दिनांक से 3 माह के भीतर बुलाई जावेगी। उसमें संस्था के नहीं किया जाता तो न्यास निर्मातागण को अधिकार होगा कि यह संस्था की आम सभा का आयोजन किसी जिम्मेदार कर्मचारी के मार्गदर्शन में एवं पदाधिकारियों का विधिवत् चुनाव कराया जावेगा।

(ब) प्रबंधकारिणी सभा:-

  • प्रबंधकारिणी सभा बैठक प्रत्येक त्रि माह होगी, तथा बैठक का एजेन्डा तथा सूचना बैठक दिनांक से सात दिन पूर्व, कार्यकारिणी के प्रत्येक सदस्य को भेजी जाना आवश्यक होगी।
  • बैठक में कोरम 1/2 सदस्यों की होगी। साधारण तथा प्रबंध यदि बैठक का कोरम पूर्ण नहीं होता है तो बैठक एक घंटे के लिये स्थगित की जाकर उसी दिनांक पर उसी समय पुनः की जा सकेगी जिसके लिये कोरम की कोई शर्त न होगी।
  • आकस्मिक स्थिति में बैठक तीन दिवस में बुलाई जा सकेगी तथा यदि कोई आकस्मिक निर्णय लेने की आवश्यकता अचानक त्वरित रूप से पड़ी तो न्यास के अध्यक्ष सचिव को निर्णय लेने का अधिकार रहेगा।

(स) विशेष सभा:-

  • यदि कम से कम कुल संख्या (कुल सदस्यों की संख्या का) के 2/3 सदस्यों द्वारा लिखित रूप से बैठक बुलाने हेतु आवेदन करें, तो उनके दर्शाये विषय पर विचार करने के लिये साधारण सभा की बैठक बुलाई जावेगी।
  • विशेष संकल्प पारित हो जाने पर संकल्प की प्रति बैठक पंजीयक को संकल्प पारित हो जाने के दिनांक से 14 दिन के भीतर भेजा जावेगा। 

 ट्रस्ट का कार्यक्षेत्र एवं कार्य करने की क्षमता – पूरे भारत में गाँव-गाँव शहरों में करना है काम –

[ट्रस्ट का उद्देश्य क्रमांक 33 – न्यासकर्तागण इस न्यास ‘‘चिकित्सा संसार पारमार्थिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक न्यास उज्जैन म. प्र.’’ की कोई भी शाखा या कार्यालय संपूर्ण भारत में कहीं भी प्रांतीय/ स्थानीय स्तर पर खोले जा सकेंगे व शाखा/ कार्यालय के संचालन हेतु पृथक से समिति का निर्माण साधारण सभा में पारित कर किया जा सकेगा।]

  • उक्त उद्देश्य ट्रस्ट के ट्रस्टियों/ कर्मचारियों को ट्रस्ट हेतु कार्य करने की पर्याप्त व्यवस्था प्रदान करता है।
  • इस उद्देश्य के तहत प्रांतीय, जिला स्थानीय स्तर पर हर व्यक्ति जो ट्रस्ट से संबद्ध है इसके उद्देश्यों के तहत कार्य कर सकेगा।
    संबद्ध व्यक्ति समितियों का निर्माण कर विभिन्न पदों का सृजन कर इसके उद्देश्यों के तहत कार्य कर सकेंगे।
  • ट्रस्ट के ट्रस्टी इसके उद्देश्यों के तहत अपने क्षेत्र में भी, इसकी विभिन्न गतिविधियों में कार्य करने हेतु सामथ्र्यवान है।
  • ट्रस्ट अपने ट्रस्टियों/कर्मचारियों को क्षेत्र में कार्य करने हेतु नगर पंचायत, नगरपालिका, विधायक, सांसद, स्थानीय प्रशासन, राज्य प्रशासन, केंद्रीय प्रशासन से सहयोग/ पहल करने की व्यवस्था प्रदान करता है, जो ट्रस्ट से जुड़े हर व्यक्ति को समाज में विशिष्ट पहचान का अहसास एक सम्मानित सदस्य के रूप में कराता है।

Explaining the Objectives.[उद्देश्यों की व्याख्या]

क्रमांक 1.:- पारमार्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, शिक्षा एवं चिकित्सा के उद्देश्य के तहत जमीन क्रय करने, भवन निर्माण और उसके पश्चात् हाॅस्पिटल, शिक्षण संस्थान, विकलांग केन्द्र, धर्मशाला, बालवाड़ी संचालन की व्यवस्था प्रदान करता है।

ट्रस्ट का यह उद्देश्य ट्रस्टियों को हाॅस्पिटल, धर्मशाला, शिक्षण संस्थान, बालवाड़ी आदि के संचालन की व्यवस्था प्रदान करता है। इस उद्देश्य हेतु ट्रस्टी स्थानीय एवं शासकीय दोनों स्तर पर दान एवं सहयोग प्राप्त कर सकते है। ट्रस्टी समिती बनाकर संचालन में महत्वपूर्ण योगदान अदा कर सकेंगे।

क्रमांक 2-  मधुमेह, एड्स, थैलीसिमिया, हेेपेटाईटिस जैसी बीमारियाँ आज समाज ही नहीं वरन् राष्ट्र के लिये भी अभिशाप बन गई है।
आज इनके रोकथाम के लिये शिक्षा, जागरूकता एवं जीवनशैली में बदलाव जरूरी है। ट्रस्ट इन विषयों पर निरंतर शैक्षणिक जानकारियों का प्रकाशन, सेमीनार कर जागृति लाना चाहता है।

क्रमांक 3.:- इस व्यवस्था के तहत हम एलोपैथ, होम्योपैथ, आयुर्वेद की ओपीडी सेवा, हाॅस्पिटल सेवाओं के विकास के साथ-साथ दूसरे संस्थान एवं शासकीय संस्थानों के साथ-साथ काम कर सकते है। हमारे ट्रस्टी अपनी सक्रियता से शासन का सहयोग कर या शासन से सहयोग प्राप्त कर समाज में अपनी उपयोगिता को सिद्ध कर रचनात्मक कार्य कर सकते है।

गत 10 वर्षाें में हमने मध्यप्रदेश स्वास्थ्य सेवाओं के 3 अंक एवं छŸाीसगढ़ के 2 अंक प्रकाशित कर एक ऐसा कार्य किया है जिससे चिकित्सा संसार की उपयोगिता सिद्ध हुई है। राजस्थान का डाटा बेस लगभग तैयार है। हम स्थानीय प्रशासन से मिलकर कार्य कर समाज में रचनात्मक भूमिका निभा सकते है।

क्रमांक 4.:- ऐलोपैथ, होम्योपैथ, आयुर्वेद, योग, नैचरोपैथ, यूनानी, सिद्धा एवं औषधी क्षेत्र के विकास, ज्ञानार्जन, संवर्धन, अनुसंधान, शिक्षण व चिकित्सा सेवाओं के लिये कार्य। उक्त क्षेत्र चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े लगभग सभी महत्वपूर्ण क्षेत्रों को समाहित करते है। इन समस्त पैथियों की उपयोगिता एवं महŸाा अलग-अलग है सभी के अपने-अपने क्षेत्र है, प्रभाव है, लाभ है।

चिकित्सा संसार की कोशिश है हम सभी लाभांवित हो या प्रक्रिया से ज्यादा महत्वपूर्ण है उस पैथी से उसे लाभ मिलना।हम सभी क्षेत्रों को शामिल कर आम व्यक्ति के लिये एक ऐसा इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाना चाहते है जिससे उसे तुरंत लाभ मिले।
इन क्षेत्रों को शामिल करने से सभी पद्धतियों के साथ न्याय का लक्ष्य भी पूरा होगा एवं कार्य भी संपन्न होंगे। गत 10 वर्षाें में हमने उक्त सभी विषयों पर विभिन्न प्रकाशन के माध्यम से जागृति लाने का कार्य किया है।
औषधि क्षेत्र को शामिल करने से उनके निर्माता, वितरक, दवा विक्रेता आदि को जोड़कर उनकी सेवाओं से जनजागृति लाने का उद्देश्य सार्थक होगा।

क्रमांक 5.:- अनुसंधान प्रशिक्षण व प्रकाशन के द्वारा ग्रामीण व जनजातीय क्षेत्रों मंे जागृति हेतु प्रौद्योगिकी एवं साॅफ्टवेअर विकसित करना।

आज ग्रामीण अंचलों व जनजागृति के लिये उनकी संस्कृति, सभ्यता एवं विकास को संरक्षित कर कार्य करना हमारी अहम जिम्मेदारी है। ट्रस्ट इस दिशा मंे प्रशिक्षण, शिक्षण के साथ-साथ आईटी सेक्टर का लाभ लेकर कार्य करना चाहता है।

क्रमांक 6.:- आम जनता के सेवार्थ ब्लड़ बैंक एवं क्लबों के विकास हेतु कार्य – रक्तदान महादान है रक्त की जरूरत कब, कहाँ व किसे होगी निश्चित नहीं है। यह महत्वपूर्ण सेवा है जिस पर जितना कार्य करे कम है।

हमारे ट्रस्टी विभिन्न केम्पों को आयोजन कर रक्तदान में सहयोग कर सकते है। यदि रक्तदाताओं का डाटाबेस बनाकर सेवा प्रदान करने की दिशा में कार्य किया जावे तो यह सेवा ‘‘नर सेवा नारायण सेवा’’ को साकार कर देगी जिसके लिये ट्रस्ट भविष्य में पहल कर सकता है। हेल्थ डायरेक्टरी के डाटा बेस में ब्लड़ गु्रप का संकलन एवं प्रकाशन हमारी एक कोशिश है।

क्रमांक 7.:- मलेरिया, स्वाईल फ्लू, डेंगू, चिकनगुनिया आदि महामारियाँ अकस्मात आती है जरूरी है ऐसे समय सेवा, जागृति एवं इन्फास्ट्रक्चर का सही उपयोग करने की दिशा में कार्य।

क्रमांक 8.:- स्वास्थ्य सेवाओं मंे कार्यरत चिकित्सकगणों एवं अन्य कर्मचारियों के उत्थान के लिये कार्य।
सम्मान समारोह 2005, 2007, 2009, 2011 और अब 2013 का आयोजन हमारे ट्रस्टियों व सहयोगियों के प्रति हमारे सेवा संकल्प की परिणिती दर्शाता है।

हमने हर उस व्यक्ति को जिसने स्वास्थ्य सेवाओं में उल्लेखनीय कार्य किया है, सम्मानिक कर प्रोत्साहित किया है एवं ऐसे सम्मानित व्यक्तियों के कार्याें-नामों को प्रकाशन के माध्यम से संरक्षित कर एवं जन-जन तक हमारे विभिन्न प्रकाशनों, प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्राॅनिक मीडिया, सोशल मीडिया जैसे फेसबुक के माध्यम से लगातार पहुँचाने का कार्य हमने किया है और यह प्रक्रिया लगातार जारी है।

क्रमांक 9.:- स्वास्थ्य कैम्प व शल्य केम्प द्वारा लाभांवित करना – सन् 2002 से लगातार अनेक स्वास्थ्य केंपो का आयोजन कर जनता को लाभांवित करने की दिशा में हमने कार्य किया है।

राजगढ़ जिले के पचोर में लगभग 10 से 12 विशेषज्ञों की टीम ने अविस्मरणीय सेवाएँ दी थी। एक मेला जैसा सैलाब दर्शनीय था। वहीं शाजापुर जिले के बोलाई में 2000 मरीजों की केम्प मंे सेवा आज भी यादगार पल है। चिकित्सा संसार के लिये ये यादगार पल है। चिकित्सा संसार न केवल केम्प आयोजन में महत्वपूर्ण मदद करता है वरन् चिकित्सकों के लिये भी प्रयास करता है कि उनकी केम्पो में सेवाएँ यादगार बन जाये।
इस कार्य में हम उन्हें स्थानीय व्यंजनों, खाद्य पदार्थों से अवगत करना कभी नहीं भूलते। डाॅ. योगेश सरीन दिल्ली ने डाॅ. चाल्र्स दंपŸिा उज्जैन के सहयोग से 4 शिशु रोग सर्जरी शिविरों में उल्लेखनीय सेवाएँ दी किंतु वे महाकाल दर्शन और उज्जैन की प्रसिद्ध फेमस कुल्फी को सदैव याद रखते है।
डाॅ. सरीन ने अनेक रोगियों को इस मंच के माध्यम से दिल्ली में निःशुल्क सेवाएँ प्रदान की। उन्होनें जितेन्द्र सराफ इन्दौर को बच्चे के लिये न केवल दिल्ली वरन् अमेरिका से भी विभिन्न जांचों में सहयोग दिया। जिनकी बाजार में सेवा लागत लगभग 10 लाख हो सकती है। उनकी सेवाओं की ही बदोलत एक ऐसी बीमारी डाइग्नोस हो सकी जिसका इलाज आज भी असंभव है किंतु लगातार लगभग 4 वर्ष तक निःशुल्क सेवाएँ एक मिसाल है।
इसी तरह पंचक्रोशी में ग्रामीणों को निःशुल्क दवाएँ प्रदान करना एवं चिकित्सा सेवा देना सभी सहयोग टीम को ‘‘नारायण के दर्शन सा एहसास’’ देते है। डाॅ. संग्राम सिंह इन्दौर, डाॅ. राजेश मरानी, डाॅ. प्रशांत जोशी इन्दौर के साथ सुपर स्पेशलिटी सेवाएँ आज भी यादगार पल है।

क्रमांक 10.:- बच्चों के स्वास्थ्य एवं समग्र विकास हेतु स्कूलों व गरीब बस्तियों के कार्य – बच्चों के मानसिक, शारीरिक एवं समग्र विकास के लिये चिकित्सा संसार लगातार प्रयासरत है।

डाॅ. नीरज गुप्ता, डाॅ. मिŸाल, डाॅ. गोविंद सिंह, डाॅ. नलीन पाटनी, डाॅ. संध्या चाल्र्स, डाॅ. नीलम चाल्र्स, डाॅ. विपिन पोरवाल, डाॅ. घनश्याम पटेल, डाॅ. पंकज पाटीदार, डाॅ. नवीन जोशी, डाॅ. उमेश शर्मा, डाॅ. अरविन्द भटनागर, डाॅ. सफी मोदीवाला, डाॅ. अजय गुप्ता, डाॅ. देशपांडे, डाॅ. मणीन्द्र व्यास, डाॅ. यू. एस. निगम, डाॅ. ओ. पी. व्यास, डाॅ. प्रमोद कौशिक, डाॅ. प्रीति सिंह, डाॅ. सतीश भावसार, डाॅ. जगदीश सन्मुखानी, डाॅ. देथलिया, डाॅ. पी. एन. वर्मा आदि अनेक विशेषज्ञ चिकित्सकों ने समय-समय पर सेवा देकर मिसाल कायम की है। पैथालाॅजी एवं डायग्नोस्टिक सेवाओं मंे भी अमित पटेल (पाटीदार), डाॅ. सोनकर (साक्षी डायग्नोसिस), स्वर्गीय डाॅ. गुप्ता की सेवाओं को हम कभी भूल नहीं सकते।
हमने स्कूलों में संपूर्ण चिकित्सा परीक्षण शिविर, बच्चियों के लिये स्त्री रोग विशेषज्ञ डाॅ. संध्या चाल्र्स की वर्कशाप, दाँतों के लिये जांच एवं टूथपेस्ट, औषधी वितरण, डाॅ. जगदीश सनमुखानी द्वारा योग एवं ध्यान शिविर, बच्चों के नेत्र परीक्षण हेतु कम्प्यूटराइज्ड जांच एवं चश्मे वितरण जैसे कार्य कर देश के भविष्य बच्चों के प्रति हमने अपनी कटिबद्धता प्रदर्शित की है।
डाॅ. विपिन पोरवाल के सहयोग से मधुमेह एवं मोटापे पर वर्कशाप सेवा की आदर्श मिसाल हो सकती है।

क्रमांक 11.:- स्वस्थ समाज के विकास हेतु सफाई एवं शौचालय जैसे निर्माण, योजनाओं एवं अनुसंधान विषय पर आज हम हमारे देश में कहीं पर भी चले जाये यत्र तत्र प्लास्टिक के ढ़ेर एवं कचरा यहाँ तक कि यदि हम रेल में भी यात्रा करे तो पायेंगे जंगल भी इस कचरे से तबाह हो रहे है।

प्लास्टिक एक ऐसी धातु/तत्व है जो कभी खत्म नहीं होता, न घुलनशील है और न ही यह पंचतत्व में किसी प्रकार से विलिन होता है, इसमें अनेकों रसायनों का भी सम्मिश्रण होता है। प्लास्टिक का उपयोग अनेक बीमारियों को भी जन्म देता है जिसके प्रमाण अनेक चैपायों की जान जाने से सिद्ध हो गये है। यहाँ तक कि अनेक गंभीर बीमारियों को आमंत्रण देने में भी इसका योगदान है जैसे हृदय रोग, किडनी रोग, त्वचा रोग, पेट संबंधी बीमारियाँ व बच्चों के रोग आदि।
देश में खाद्य पदार्थों के सेवन एवं वितरण की कोई आदर्श व्यवस्था काम नहीं कर रही है। यत्र तत्र होटलों के बाहर या ठेलों पर खड़े-खड़े लोग दिनभर खाद्य पदार्थ खाते हुए दिख जायेेंगे।
ये व्यक्ति खाद्य सामग्री, कागज, प्लेट आदि सड़क पर ही फेंक देते है। खुले में सब्जी का विक्रय, मांस, मदिरा सेवन या विक्रय सार्वजनिक धुम्रपान और उनके द्वारा उपजा वेस्ट जैसे नजारे आम है। इन सब का वेस्ट आज स्वास्थ्यगत कारणों से बड़ी समस्या बन रहा है।
बारिश के समय महानगरों/नगरों में यही वेस्ट सभी के लिये भारी समस्या बन जाता है जब नालियाँ (डेªनेज) जाम हो जाती है, सड़न बढ़ने लगती है। देश में शौचालयों के लिये सरकार द्वारा करोड़ों-अरबों रूपया खर्च किया जा रहा है फिर भी इस दिशा में अभी जागृति की जरूरत है।
आज से लगभग 8-10 वर्ष पूर्व चीन इन व्यवस्थाओं में काफी पिछड़ा था किंतु आज वहाँ क्रांतिकारी परिवर्तन आये है। लोगों की जीवनशैली में बदलाव आया है। लोग स्वच्छ माहौल में रचनात्मक, सामाजिक, सांस्कृतिक, पारिवारिक पृष्ठभूमि द्वारा मजबूत चीन के निर्माण में लगे है।
कमोबेश व अन्य समृद्ध राष्ट्रों की भी यही स्थिति है। हमें देश के विकास हेतु स्वच्छ पर्यावरणीय वातावरण तैयार करना होगा और यह सरकार की नहीं वरन् हम सब की जिम्मेदारी है।

क्रमांक 12.:- वाचनालयों एवं पुस्तकालयों की स्थापना, संचालन:- चिकित्सा संसार गत 15 वर्षांे से लगातार सार्थक प्रकाशन की दिशा में कार्य कर रहा है। इसका हर अंक संकलनीय है। पुस्तकें ज्ञान का खजाना है और इसे सहेजना हम सब की जरूरत है जिसे वाचनालयों एवं पुस्तकालयों द्वारा ही सहेजा जा सकता है। इस हेतु ई-लाइब्रेरी एवं अन्य अतिरिक्त सेवाएँ ट्रस्टी अपनी क्षमतानुसार विकसित कर सकते है।

क्रमांक 13.:- महिलाओं एवं बच्चों के विकास के लिये शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषक आहार एवं चिकित्सा सेवा।
चिकित्सा संसार ने महिलाओं के उत्थान हेतु अनेक उज्जैन में आयोजन किये है जिसमें अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर सम्मान, मिनोपाज, सर्वाइकल कैंसर, आस्टियोपोरोसिस, ओबसिटी, प्रिग्नेसी जैसे विषयों पर हमारी सेवा की मिसाल बहन डाॅ. संध्या चाल्र्स के सहयोग से कार्यशाला का आयोजन एवं उक्त विषयों पर विशेषांकों का प्रकाशन कर चुके है।
बच्चों के लिये कार्याें का उल्लेख हम पूर्व में कर चुके है। उनके लिये पोषक आहार, शिक्षा हेतु कार्य करना हमारा दायित्व है।
क्रमांक 14.:- मानवाधिकार, बाल अधिकार, महिला अधिकार के लिये सामाजिक जन चेतना व पीडि़त के लिये चिकित्सा व कानूनी सहायता।

हम सोशल मीडिया फेसबुक व ईमेल के माध्यम से लगातार कार्यरत है। ज्वलंत समस्याओं के समाधान हेतु आज देश के लगभग 5000 से अधिक प्रमुख व्यक्तियों, राजनेताओं, विचारकों, चिकित्सकों, समाजसेवियों लायंस साथियों को समय-समय पर मेल भेजकर हम जिम्मेदार नागरिक का दायित्व निभा रहे है।
हमारे सहयोगी/ट्रस्टी यदि पूरे देश में मिलकर सेवा के क्षेत्र में कार्य करते है तो वे समाज में अपनी सेवाओं से विशिष्ट पहचान बनायेंगे और समृद्ध राष्ट्र के निर्माण में हमारा योगदान स्मरणीय हो जावेगा।

क्रमांक 15.:- प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण हम सबकी जिम्मेदारी है। भारत में हर जगह पर्याप्त प्राकृतिक संपदा है। प्राकृतिक संपदा व संसाधन के संरक्षण में ही हमारी सुरक्षा है।

क्रमांक 16.:- स्वच्छ पेय जल का स्वस्थ जीवन में महत्वपूर्ण योगदान है और इसकी उपलब्धता, गुणवŸाा, वितरण, संरक्षण पर कार्य कर हम जन-जन की सेवा कर सकेंगे।

क्रमांक 17.:- हस्तशिल्प, हस्तकला, वास्तुकला, संगीत, नृत्यकला को समाहित करना। यह उद्देश्य हर व्यक्ति के जीवन में खुशियों और स्वस्थ जीवन जीने के रंग भरने हेतु पर्याप्त व्यवस्था प्रदान करता है।

क्रमांक 18.:- निर्बल पिछड़े वर्ग, आदिवासी, वनवासी, सामान्य वर्ग की महिला एवं बच्चों के लिये केंद्र व राज्य सरकारों की योजनाओं पर कार्य ट्रस्टियों को सेवा करने, कार्य करने का विस्तृत क्षेत्र उपलब्ध कराता है।

क्रमांक 19.:- स्वास्थ्य एवं शिक्षा सेवाओं की जानकारी एवं विकास हेतु एक केंद्रीय स्थान व उसकी प्रांत व जिला स्तर पर शाखाओं व संस्थानों का विकास ट्रस्ट के उद्देश्यों की व्यापकता व दूरदर्शिता को दर्शाता है।

क्रमांक 20.:- इस उद्देश्य के तहत हम लगातार कार्य कर रहे है और आगे भी करते रहेंगे।
क्रमांक 21.:- पर्यटन व विकास गोष्ठियाँ ट्रस्टियों को उनकी विशिष्टता का एहसास करायेगी।

क्रमांक 22.:- स्वास्थ्य, शिक्षा, कला, संस्कृति, सामाजिक एवं जनविकास में कार्य कर रहे व्यक्तियों के लिये प्रोत्साहन एवं सम्मान समारोह पर हम सन् 2005 से कार्यरत है। 2007, 2009, 2011 में अखिल भारतीय चिकित्सा सम्मान समारोह एवं सांस्कृतिक आयोजन कर हमने अपनी कटिबद्धता सिद्ध कर दी है।

अनेक अभिनंदन व सम्मान समारोह कर हम सामाजिक विकास व प्रोत्साहन की दिशा में उल्लेखनीय कार्य कर चुके है।

क्रमांक 23.:- सेलेब्रल पाॅल्सी जैसे विषय पर भी हमने यथासंभव प्रयास किये है कि लोगों को इसके बारे में विस्तृत जानकारी हो। हमारे पत्र पत्रिका प्रकाशन में हमने इसे विशिष्ट ध्यान दिया है। इस संबंध में डाॅ. अनिरूद्ध पुरोहित निम्स हैदराबाद ने हमें समय-समय पर मार्गदर्शित किया है।

हमने गत 10 वर्षों मंे चिकित्सा व शिक्षा, फार्मा क्षेत्र में अनेक उल्लेखनीय कार्य किये है। इन विषयों पर न केवल प्रकाशन किया है वरन् समय-समय पर संबंधित अधिकारियों, प्रशासकों से पत्र व्यवहार कर उन्हें सुझाव दिया है। दवा व्यापारियों के लिये राष्ट्रीय स्तर पर अनेक मुद्दे उठाये है।
अनेक वार्ताओं, कांफ्रंेसो में भाग लेकर, आयोजन कर, विचार प्रदान कर, मेल एवं एसएमएस से जागृति लाने का कार्य निरंतर जारी है। आशा है यह कार्य ट्रस्ट के विस्तार से और विस्तारित होगा।

 चिकित्सा संसार पारमार्थिक न्यास (रजी.) गतिविधियाँ एक नजर में वर्ष २००३ से २०१५ .

  • पांच अखिल भारतीय चिकित्सा सेवा सम्मान समारोह|
  • मधुमेह, योग, पर पुस्तक अनेक विशेषांक एवं प्रतिमाह नियमित प्राकाशन|
  • अनेक स्मारिकाओं का प्रकाशन|
  • शिशुरोग, सर्जरी के केम्पस, एवं ग्रामीण- शहरी अंचल में अनेकों केम्प|
  • आयुर्वेद, होमिओपेथी, एवं एलोपेथ आधारित कार्यशालाएं एवं अन्य आयोजन|
  • अनेक सांस्कृतिक आयोजन|
  • मध्यप्रदेश, छत्तीस गढ़ की स्वस्थ्य सेवाओं, के डाटा का निरंतर संकलन और प्रकाशन|
  • चिकित्सा सेवाओं और जन स्वस्थ्य आधारित सेवाओं पर शासन से निरंतर पहल, एवं जनता का ध्यानाकर्षण|
  • भारतीय जीवन शेली, संस्कृति, एवं सेवाओं पर निरंतर अध्ययन एवं प्रचार प्रसार|
  • प्रति बुधवार चार्ल्स हॉस्पिटल में चेरिटीबल ओ पी डी एवं Rs 7,000/-में आपरेशन सेवा|

Donors and Trustees get – Magnification, Encouragement, and Self-conceit.
दान दाताओं और न्यासियों को मिलता है – प्रशंसा, प्रोत्साहन, और आत्मसंतोष।

स्थाई संपत्तियां एवं सेवाएँ

  1.  नामकरण अपने पसंद का– दानदाता ट्रस्ट को किसी भी प्रकार की सेवा कार्य योजना में सहयोग करता है तो वह उस योजना/ सम्पत्ति का नामकरण अपने पसंद के नाम से करवा सकता है जैसे हॉस्पिटल्स या उस प्रिमाइसेस में किसी सेवा या कक्ष का निर्माण/ शुभारंभ, कम्युनिटी हाल, शिक्षण संस्थान, केम्प, आयोजन, गतिविधि कोई सेवा आदि।
  2.  ट्रस्ट के कार्या में, अस्पताल, धर्मशाला एवं शिक्षण संस्थान का विकास प्रमुख है। सेवाओं की आज हर ग्राम हर घर में जरूरत है।
  3. दान का सदुपयोग- ट्रस्ट के साथ दानदाता को प्राप्त होता है, एक अनुभवी विशाल राष्ट्रीय नेटवर्क जिससे वे अपने दान का सदुपयोग सही दिशा में कर सकते है। ट्रस्ट के कारण उनके संरक्षण एवं विकास में सही दिशा मिलेगी।
  4. स्थाई संपत्ति सुरक्षा- ट्रस्ट विधान अनुसार दानदाता की दान की गई राशि से विकसित, स्थाई सम्पत्ति का विक्रय नहीं हो सकता अर्थात जो भी सम्पत्ति परमार्थ हेतु विकसित की जायेगी उसका सदुपयोग होने की ट्रस्ट अधिनियम सुरक्षा मुहैया कराता है।
  5.  ट्रस्ट अनुरोध करता है कि कोई भी स्थाई संपदा को विकसित करने से पूर्व उसके सदुपयोग, संरक्षण की पूर्ण व्यवस्था हो उसका मेंटेनेंस हो अतएव समस्त दानदाताओं, ट्रस्टियों से निवेदन है, कि वे योजना क्रियान्वयन से पूर्व ट्रस्ट के अनुभवी एवं विशेषज्ञ ट्रस्टियों की सेवाओं, सुझावों का मार्गदर्शन एवं लाभ सदैव प्राप्त करते रहे।
  6.  ट्रस्ट उन सभी तकनीकी विशेषज्ञों एवं सेवाभावियों से निवेदन करता है कि वे ट्रस्ट से जुड़कर अपनी सेवाओं का जनकल्याण हितार्थ उपयोग करें क्योंकि ट्रस्ट के संस्थापक के रूप में गत 10 वर्षों में हमने हमारे सहयोगियों की सेवाओं-विशेषताओं को राष्ट्रीय/अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहुँचाने के लिये यथाशक्ति ईमानदारी से यथासंभव प्रयास किये है और हमारे हर सहयोगी आज अपने क्षेत्र में उल्लेखनीय सेवाओं से अपना नाम रोशन कर रहे है।
  7. ट्रस्ट के विधान के अनुसार ट्रस्ट विभिन्न शाखाओं/ समितियों का गठन कर सकता है।

ट्रस्ट का उद्देश्य क्रमांक 26 एवं 35 इस संबंध में पर्याप्त व्यवस्था प्रदान करते है।

इन व्यवस्थाओं अनुसार –

  1.  ट्रस्ट की प्रांतीय, जिला एवं स्थानीय स्तर पर समितियों का गठन किया जा सकता है।
  2.  ट्रस्ट के कार्यालय या शाखाओं का संचालन किया जा सकता है।
  3.  शाखा/कार्यालय संचालन हेतु पृथक समिति का निर्माण साधारण सभा में पारित कर किया जा सकता है।
  4.  स्वास्थ्य एवं शिक्षा की जानकारी एवं विकास हेतु अखिल भारतीय स्तर पर संस्थाओं/शाखाओं का विकास किया जा सकता है।
  5.  ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं सचिव की अनुमति से ट्रस्ट के बैंक खाते विभिन्न स्थानों पर खोले जा सकते है जिसमें ट्रस्ट के अध्यक्ष/ सचिव एवं किसी अन्य प्राधिकृत व्यक्ति में से किन्हीं दो के हस्ताक्षर से ऐसे खातों का परिचालन किया जा सकता है। इस व्यवस्था के तहत ट्रस्ट के कार्यों को संपूर्ण भारत में पहुंचाने में एवं ट्रस्टियों को सिमित स्वतंत्रता के साथ कार्य करने की व्यवस्था मिलती है।
  6. इस व्यवस्था के तहत ट्रस्ट स्वास्थ्य सेवाओं की विभिन्न स्वतंत्र इकाइयों की स्थापना करेगी एवं उन इकाइयों के तहत उससे संबंधित सेवाओं का विकास कर सेवा कार्य कर जन-जन को लाभांवित करेगी जैसे एलोपैथ के क्षेत्र में निम्न प्रकार कार्याें के अनुसार समितियों का गठन किया जा सकता है।
  7. योग, आयुर्वेद, होम्योपैथ, नैचरोपैथ आदि क्षेत्रों में भी उक्त अनुसार समय, आवश्यकता अनुसार समिति व संस्थाओं का गठन किया जा सकेगा।
  8. शिक्षा के क्षेत्र में ट्रस्ट अपने ट्रस्टियों की मदद से देश में कहीं भी शैक्षणिक सेवाओं/गतिविधियों को प्रारंभ कर सकेंगे। ये शैक्षणिक गतिविधिन्य से लगाकर उच्च शिक्षा तक हो सकती है।
  9. ऐसी संस्थाओं को भारत सरकार राज्य एवं स्थानीय प्रशासन के समस्त नियमों, बंधनों का पालन अनिवार्य होगा। ट्रस्टी/ समिति को भारत के विधान अनुरूप ही कार्य करने के अधिकार प्राप्त होंगे।
Work Dispensation.(कार्य व्यवस्था)

अध्यक्ष:

अध्यक्ष के कर्तव्य -ट्रस्ट के अध्यक्ष पर ट्रस्ट के संपूर्ण संचालन की जिम्मेदारियाँ है और मीटिंगों के आयोजन सेवा गतिविधियों प्रशासनिक गतिविधियों से लगाकर हर विषय पर अपने सहयोगियों को साथ लेकर चलना अध्यक्ष का दायित्व है।

सचिव:-

सचिव के कर्तव्य –सचिव ट्रस्ट अध्यक्ष की देखरेख में काम करता है। अध्यक्ष की अनुपस्थिति में पूरे प्रशासनिक कार्यों को अंजाम देना तथा देखरेख करना इसका मुख्य कार्य है, उसके कर्तव्यों में यह भी शामिल है –
मीटिंग का ब्यौरा रखना – ट्रस्ट की बैठक के बाद उसकी जानकारी भेजना। कार्यकारिणी द्वारा मांगे जाने पर विवरण प्रस्तुत करना। महासभा की बैठक का आयोजन करना। कार्यकाल समाप्त होने पर आगामी सचिव को सभी महत्वपूर्ण रिकार्ड एवं जानकारी हस्तांतरित करना।
मीटिंग की तैयारी:- बैठक की तैयारी में सचिव के तीन मुख्य कर्तव्य है –

  1. अध्यक्ष के अनुरोध और संयोजकों के सभी विषय शामिल किये जाये।
  2. ट्रस्ट समितियों और सभी पदाधिकारियों को मीटिंग का स्थान और समय बताना।
  3. बैठक कर गतिविधि को विस्तार से लिखना।
  4. बैठक की व्यवस्था करना।

कोषाध्यक्ष:-

 कोषाध्यक्ष के कर्तव्य –

  1. अध्यक्ष के मार्गदर्शन में उसकी अपेक्षानुसार कार्य करना,
  2. वित्तीय  वर्ष के प्रारंभ में बजट तैयार करने में अध्यक्ष की मदद करना, ट्रस्ट सदस्यों से बकाया सदस्यता शुल्क रिमाइंडर भेजना व शुल्क प्राप्त करना।
  3. वित्तीय वर्ष के अंत में अपने पूरे कार्यकाल के हिसाब का आॅडिट करवा कर संबंधित पदाधिकारियों को प्रेषित करना।
  4. अगले कार्यकाल के कोषाध्यक्ष को आॅडिट किया हुआ हिसाब मय दस्तावेज हस्तांतरित करना।
  5. बहुत जरूरी है बजट तथा खर्च का सही सामंजस्य। किये गये बजट से खर्च, यदि कहीं कम ज्यादा है तो कार्यकारिणी से स्वीकृति लेना तथा प्रत्येक सभा में लेखा जोखा प्रस्तुत करना जरूरी है।
  6. आॅडिट किया गया हिसाब अगले वर्ष महासभा में देना जरूरी है।

Link  Ideal meeting agenda  बैठक का आदर्श एजेंडा:-

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Main Aim मुख्य लक्ष्य

ट्रस्टी बनकर एवं आर्थिक सहयोग द्वारा सेवाओं में योगदान हेतु सादर आमंत्रित| 

 

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