constipation

*कोष्ठबद्धता* (कब्ज):–अनियमित रुप से शौच जाने पर कब्ज की विकृति होती है।सुबह देर तक बिस्तर पर पड़े रहने और समय पर शौच के लिए नहीं जाने से पुरीष (मल) आंत्रों में एकत्र होने लगता है। और मल एक दिन में अधिक शुष्क और कठोर हो जाता है और मल निकल नहीं पाता।इससे ही कब्ज होती है । इसके कारण ही पेट दर्द, गैस, आफरा, जी मचलना, सिरदर्द, चक्कर आना आदि की विकृति होती है। उपचार:–
1.त्रिफला का चूर्ण 5ग्राम हल्के गर्म पानी के साथ रात को सोते समय सेवन करने से कोष्ठबद्ध ता नष्ट होती है ।
(2) 200ग्राम हल्के गर्म जल में 5ग्राम नींबू का रस और 5ग्राम अदरक का रस और 10ग्राम मधु मिलाकर सेवन करने से कब्ज शीघ्र नष्ट होती है ।
(3) रात्रि में सोने से 30-40 मिनट पहले गर्म जल में 10ग्राम मधु मिलाकर पीने से प्रातः खुलकर शौच आती है।कुछ दिनों तक सेवन करने से कोष्ठबद्धता पूरी तरह नष्ट हो जाती है ।
(4) 5-6अंजी र 250ग्राम जल में उबालकर, छान कर पीने से कोष्ठबद्धता का शीघ्र निवारण होता है ।
(5) 20ग्राम ईसब गोल रात्रि को सोने से 30 मिनट पहले गर्म दूध के साथ सेवन करने से कोष्ठबद्धता शीघ्र नष्ट होती है ।
(6) कोष्ठबद्धता के रोगी को दिन में15 से 20 गिलास पानी अवश्य पीना चाहिए ।
(7) प्रतिदिन रात को सोने से पहले 30ग्राम गुलकंद खाकर दूध पीने से कोष्ठबद्धता नष्ट होती है ।

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