Category Archives: ResearchWork&RespiratorySystem

Sciatica Treatment – Dr. Ram Arora.

Sciatica treatment – PARIJAT  leaf and the Blood Disengagement (Rakt-Mokshan) have good results.

गृध्रसी में पारिजात पत्र और रक्त मोक्षण के हें अच्छे परिणामdr arora

Sciatica सायटिका

Pain affecting the back, hip, and outer side of the leg, caused by compression of a spinal nerve root in the lower back, often owing to degeneration of an intervertebral disk. The commonest cause of true sciatica is prolapse of intervertebral discs.- Editor.

चलने का नाम ही जीवन है, परंतु कुछ रोग ऐसे हैं, जिसमें रोगी का चलना फिरना दुर्लभ हो जाता है, और वह दूसरों की तरफ सहायता के लिए दयनीय भाव से देखता रहता है। ऐसा ही एक रोग है ”सायटिका”, जिसमें जब मनुष्य को असहनीय दर्द होता है तो वह ईश्वर से मृत्यु तक की प्रार्थना करता है।

परिचय

इस रोग का अधिक परिचय देने की आवश्यकता नहीं, सामान्यत: सभी इस नाम से परिचित रहते हैं। यह कमर से निकलने वाली सायटिका नाड़ी (नर्व) की सूजन अथवा इस पर किसी प्रकार का दबाव पडऩे से यह दर्द उत्पन्न होता है, जो कि कमर से लेकर पुट्टे (Buttock) से होता हुआ टांग के पिछले हिस्से से पैर के अंगूठे तक जाता है तथा इस दर्द के साथ ही प्राय: रोगी को सुन्नता अथवा सुई चुभने जैसी पीड़ा होती है।

यह दोनों टांगों में हो सकती है, परंतु प्राय: एक ही तरफ के रोगी अधिक मिलते हैं। इस विशेष प्रकार के दर्द के कारण सामान्य व्यक्ति भी कह देता है, कि यह सायटिका का दर्द है। इस दर्द से रोगी को न बैठने से राहत मिलती है, न चलने से और न ही लेटने से आराम मिलता है। इसलिए रोगी बैचेन होकर कभी लेटता है, कभी उठता है, कभी चलता है तो कभी बैठता है, परंतु उसे दर्द से राहत नहीं मिलती तथा फिर इस दर्द के डर से रोगी मानसिक तनाव में आने लगता है, जिससे इस तनाव से दर्द और बढ़ जाता है। इस प्रकार रोगी को दर्द के डर से तनाव और तनाव से फिर दर्द, इस प्रकार दोनों ही बढ़ते चले जाते हैं।

ओषधि के साथ रक्त मोक्षण भी है चिकित्सा

दर्द के इसी डर से रोगी चलते समय एक विशेष प्रकार की चाल से चलने लगता है, जो गिद्ध (गृघ्र) की
चाल जैसी होती है, इसलिए आयुर्वेद में इस रोग को ‘गृघ्रसी’ कहा जाता है। आयुर्वेद के अनुसार वात दोष के प्रकोपक विभिन्न प्रकार के आहार-विहार के कारण यह रोग होता है। आयुर्वेद के प्राय: सभी ग्रंथों में इसकी विभिन्न प्रकार की चिकित्सा का वर्णन है, जिसमें विभिन्न प्रकार की औषधियों के साथ ही रक्त मोक्षण का भी उल्लेख मिलता है।

पारिजात पत्र क्वाथ से हुआ 80% लाभ  

चक्र दत्त के ग्रंथ में पारिजात (हारसिंगार) पत्र के क्वाथ का वर्णन किया गयाCARS1 है। इसी उल्लेख के आधार पर हमने पारिजात, जिसे शेफालिका या हारसिंगार भी कहते हैं तथा जिसका वैज्ञानिक नाम Nyctanthes arbortristin है, के पत्रों का क्वाथ बना कर १८ रोगियों को एक माह तक प्रयोग करवाया, जिसके परिणाम निम्न रहे-

१. १८ रोगियों में से अधिकांश की आयु ४० वर्ष से कम थी।

२. महिला तथा पुरुषों में यह सामान्य रूप से पाया गया।

३. गरीब वर्ग के व्यक्तियों में यह रोग कुछ अधिक पाया गया।

४. शहर की तुलना में ग्रामीण क्षेत्र के रोगी कुछ अधिक पाये गये।

५. नौ महिला रोगियों में से सात गृहणियाँ थीं।

६. लगभग ९० (नब्बे) प्रतिशत रोगी हिन्दू पाये गये।

७. रोग के कारण को देखा जाय तो १८ में से ३ रोगियों के गिरने से चोट लगने के बाद, दो रोगियों को भारी वजन उठाने के कारण तथा नौ महिलाओं में से तीन को सामान्य प्रसव के पश्चात भी यह रोग हो गया।

८. एक माह तक पत्तों का क्वाथ पिलाने पर लगभग ८० प्रतिशत रोगियों को विभिन्न लDR Ram Aroraक्षणों में लाभ देखा गया।

रक्त मोक्षण ने दिया प्रभावशाली परिणाम.

इसी प्रकार हमने कई अन्य रोगियों में विभिन्न वात शामक औषधियों के साथ ही रक्त मोक्षण की क्रिया की जो कि शीघ्र प्रभावकारी प्रमाणित हुई। हमने औषधियों के साथ ही कटि वास्ति, नाड़ी स्वेदन, अलावू तथा रक्त मोक्षण आदि प्रक्रियाओं को किया, जिसमें से रक्त मोक्षण की प्रक्रिया से रोगी को शीघ्र परिणाम मिले।

रक्त मोक्षण आयुर्वेद की पंचकर्म चिकित्सा के अंतर्गत होने वाली एक प्रक्रिया है, जो कि जलौंका (लीच), शृंगी, अलावू, घटी यंत्र आदि के द्वारा प्रच्छान्न करके की जाती है। हमने इनका अत्यंत आसान एवं सुलभ परिवर्तित रूप में प्रच्छान कर एक कांच के ग्लास में नकारात्मक दबाव उत्पन्न कर रक्त मोक्षण (खून निकालना) की प्रक्रिया की।

उपरोक्त प्रक्रिया में यदि आप कुछ और जानना चाहे तो सम्पर्क कर सकते हैं।

डॉ. राम अरोरा

एम.डी. (आयुर्वेद) arora.ram15@gmail.com

Ayush Center
Hide Buttons