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जॉइंट पैन का घरेलू उपचार??

जोड़ो का कैसा भी दर्द हो इसे प्रयोग करेआज कल जोड़ो के दर्द (Joint Pain) की समस्या आम हो गयी है और बढ़ती उम्र में ये बीमारी अक्सर लग जाती है डॉक्टर्स के पास जाकर भी इन दर्द से तब तक ही आराम होता है जब तक आप उनकी दवाईयाँ खाते रहते है और जैसे ही ट्रीटमेंट बंद किया फिर से वही प्रॉब्लम शुरू -आखिर कब तक आप इस प्रॉब्लम जे झुजते रहोगे, आएये आज हम आपको बताते है कि कैसे आप घर पर ही डॉक्टर जैसा ट्रीटमेंट कर सकते है वो भी घरेलु नुस्खो से- अगर ये नुस्खे आप कुछ दिनों लगातार करेंगे तो आप पायेगे की आप की बीमारी बहुत हदतक ठीक हो चुकी होगी-तो जानते है क्या है वो नुस्खे जिन्हें आप जानकर भी अनजान है-एक जोड़ो का दर्द ऐसा है जो युवा व बुजुर्ग दोनों वर्गों में कभी भी हो जाता है वो है गर्दन का दर्द ( Nack Pain ) जी हा एक बार अगर हो गया तो फिर आपकी गर्दन सीधी ही रहेगी ना लेफ्ट होगी और ना राईट होगी शायद आप इस दर्द को पहचानते भी होंगे तो चलो इसदर्द से निजात पाने का नुस्खा बताते है –
पहला नुस्खा :-आप पंसारी के यहाँ जाये ओर वहा से भमुने का तेल 15 ग्राम और महुवे का तेल 15 ग्राम ले आये अब आप इन दोनों को अच्छे से मिक्स कर ले और एक बोतल में रख ले -अब इस तेल को जहा भी जोड़ो का दर्द है जैसे गर्दन, घुटने आदि जहा भी जोड़ो का दर्द हो वहा इस तेल की मालिश करे, ध्यान रखे मालिश हमेशा नीचे से उपर की और करे, अगर आप इस तेल की मालिश धुप में बेठ कर करेंगे तो ये बहुत ज्यादा आराम करेगा, अगर प्रस्थिति न हो तब आप मालिश के बाद उस जगह की हलके हलके सेक सकते है -ये एक जादुई फार्मूला है इस नुस्खे से आप अपने दर्द को चुमंतर कर सकते है -पुराने जोड़ो के दर्द में इसका प्रयोग लगातार 10 से 15 दिन तक करे

-दूसरा नुस्खा:-जिसे आप सब जानते है पर उसके गुण नहीं पहचानते, जी हा वो है अजवायन, अजवायन दर्द निवारक तो है ही और गैस को मिटने वाली, भूखबढ़ने वाली और वायु रोग में भी कारगर है जोड़ो के दर्द में आप अजवायन का ये नुस्का अपनाये इससे आपको बहुत लाभ होगा सभी चीजे पंसारी के यहाँ मिल जाती है -अजवायन का तेल- 10 ग्रामपिपरमिंट- 10 ग्रामकपूर- 20 ग्रामउपरोक्त तीनो चीजो को आपस में मिलकर एक शीशी में रख दे थोड़ी देर में सब आपस में मिल जायेगे -जब इस मिश्रण को 7 या 8 घंटे होजाये तब आप इसे प्रयोग में ला सकते है कैसा भी दर्द हो आप इस मिश्रण को हिलाकर, इसकी मालिश करने से दर्द से छुटकारा मिलेगा होगा

-अन्य प्रयोग :-शहद में ढाक के बीज का चूर्ण मिला कर इस मिश्रण का लेप करने से भी जोड़ो के दर्द में फायदा होता है -लहसुन की 10 छिली हुई कालिया, 150 ग्राम दूध व इतना ही पानी मिलकर इसे जब तक पकाए जब तक यह आधा न रह जाये , अब पके हुए लहसुनको निकालकार इसे पके दूध के साथ सेवन करेने से जॉइंट्स पैन मेंलाभ मिलता है -रात को सोते समाये गुनगुने दूध में एकछोटी चमच हल्दी की मिलाकर पीने से भी जोड़ो के दर्द में आराम मिलता है -घुटनों को फ्लेक्सिबल करने के लिए दाल चीनी, हल्दी, जीरा और अदरक का प्रयोग अपने खाने में करते रहे -अगर आप घुटनों में दर्द रहता है तो आप काले चने रात को भीगा कर रख दे और सुबह चबाकर खाए तो आप के घुटनों के दर्द को आराम मिलेगा – ऐसे 20 से 25 दिन करे –

A TO Z Ortho oil-

संपर्क सूत्र :- आयुष सेण्टर

शुगर का इलाज

शुगर का इलाज”​​
१-लहसुन छिला हुआ 25 gm
२-अदरक (ताज़ा) 50 gm
३-पुदीना fresh 50 gm
४-अनारदाना खट्टा 50 gm

इन चारों चीज़ों को पीस कर चटनी बना लें।
और सुबह, दोपहर और शाम को एक-एक चम्मच खा लें।
पुरानी से पुरानी शुगर, यहाँ तक कि शुगर की वजह से जिस मरीज़ के जिस्म के किसी हिस्से को काटने की सलाह भी दी गयी हो तब भी ये चटनी बहुत फायदेमंद इलाज है।
अगर हो सके तो इसे आगे भी फॉरवर्ड कर दें।
क्या पता किसी ज़रूरतमंद को वक़्त पर मिल जाये।
“शुक्रिया”

सर दर्द का उपचार

सरदर्द के लिए अचूक “प्राकृतिक चिकित्सा “मात्र पांच मिनट में सरदर्द “गायब”​​
नाक के दो हिस्से हैं दायाँ स्वर और बायां स्वर जिससे हम सांस लेते और छोड़ते हैं ,पर यह बिलकुल अलग – अलग असर डालते हैं और आप फर्क महसूस कर सकते हैं |
दाहिना नासिका छिद्र “सूर्य” और बायां नासिका छिद्र “चन्द्र” के लक्षण को दर्शाता है या प्रतिनिधित्व करता है |
सरदर्द के दौरान, दाहिने नासिका छिद्र को बंद करें और बाएं से सांस लें |
और बस ! पांच मिनट में आपका सरदर्द “गायब” है ना आसान ?? और यकीन मानिए यह उतना ही प्रभावकारी भी है..

अगर आप थकान महसूस कर रहे हैं तो बस इसका उल्टा करें…
यानि बायीं नासिका छिद्र को बंद करें और दायें से सांस लें ,और बस ! थोड़ी ही देर में “तरोताजा” महसूस करें |

दाहिना नासिका छिद्र “गर्म प्रकृति” रखता है और बायां “ठंडी प्रकृति”
अधिकांश महिलाएं बाएं और पुरुष दाहिने नासिका छिद्र से सांस लेते हैं और तदनरूप क्रमशः ठन्डे और गर्म प्रकृति के होते हैं सूर्य और चन्द्रमा की तरह |

प्रातः काल में उठते समय अगर आप बायीं नासिका छिद्र से सांस लेने में बेहतर महसूस कर रहे हैं तो आपको थकान जैसा महसूस होगा ,तो बस बायीं नासिका छिद्र को बंद करें, दायीं से सांस लेने का प्रयास करें और तरोताजा हो जाएँ |

अगर आप प्रायः सरदर्द से परेशान रहते हैं तो इसे आजमायें ,दाहिने को बंद कर बायीं नासिका छिद्र से सांस लें
बस इसे नियमित रूप से एक महिना करें और स्वास्थ्य लाभ लें

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घरेलू उपचार के अन्तेर्गत विभिन्न फोर्मुले सोशल मीडिया से लिए गये है चिकित्सा संसार प्रबंधन इसके किसी भी प्रभाव या दुष्प्रभाव के लिए जिम्मेदार नहीं है

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आयुर्वेद में चमत्कारिक तेल और उनके लाभ
आयुर्वेदिक तेलों के बारे में जरूर सुना होगा। ज्यादातर, बालों की समस्याओं के लिए कई आयुर्वेदिक तेल बाजार में बाजार में उपलब्ध हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि स्वास्थ्य और सौंदर्य की हर समस्या के लिए आयुर्वेदिक तेलों का प्रयोग किया जाता है, जो बेहद फायदेमंद होते हैं। जानिए ऐसे ही स्रह्नआयुर्वेदिक तेल और उनके फायदे –
महाभृंगराज तेल
सिर पर इसकी धीरे-धीरे मालिश करने पर यह बालों का गिरना बंद करता है और गंजापन समाप्त कर बालों को बढ़ाने में मदद करता है। असमय सफेद हुए बालों को काला करने के साथ ही यह सिर की गर्मी को शांत कर माथे को ठंडा करता है।
नारायण तेल
सब प्रकार के वात रोग, पक्षघात (लकवा), हनुस्म्भ, कब्ज, बहरापन, गतिभंग, कमर का दर्द, अंत्रवृद्धि, पाश्र्व शूल, रीढ़ की हड्डी का दर्द, गात्र शोथ, इन्द्रिय ध्वंस, वीर्य क्षय, ज्वर क्षय, दांतों के रोग, पंगुता आदि के लिए यह एक प्रसिद्ध औषधि है। दो-तीन बार पूरे शरीर में मालिश करना एवं 1 से 3 ग्राम की मात्रा में दूध के साथ पीना फायदेमंद है।
महाविषगर्भ तेल
यह सभी प्रकार के वात रोगों की प्रसिद्ध औषधि। जोड़ों की सूजन समस्त शरीर में दर्द, गठिया, हाथ-पांव का रह जाना, लकवा, कंपन्न, आधा सीसी, शरीर शून्य हो जाना, नजला, कर्णनाद, गण्डमाला आदि रोगों में सुबह व रात्रि में इस तेल से मालिश करें।
महामरिचादि तेल
इसके प्रयोग से खाज, खुजली, कुष्ठरोग, मुंह के दाग व झाई, दाद, बिवाई आदि चर्म रोगों और रक्त के रोगों में लाभ होता है। एवं इस तेल से त्वचा के काले व नीले दाग नष्ट होते हैं व त्वचा स्वच्छ होती है।

चंदनबला लाशादि तेल
इसके प्रयोग से शरीर की सातों धातुओं में वृद्धि होती है एवं वात विकार नष्ट होते हैं। कास, श्वास, क्षय, शारीरिक क्षीणता, दाह, रक्तपित्त, खुजली, शिररोग, नेत्रदाह, सूजन, पांडू व पुराने ज्वर में यह बेहद उपयोगी है। दुबले-पतले शरीर को पुष्ट करता है एवं बच्चों के लिए सूखा रोग में लाभकारी है। सुबह व रात्रि को इसकी मालिश करना लाभकारी है।
इरमेदादि तेल
यह तेल दांत के रोगों में खास तौर से लाभदायक। मसूढ़ों के रोग, मुंह से दुर्गंध आना, जीभ, तालू व होठों के रोगों में भी यह बेहद लाभप्रद है। मुख के रोगों में इसे मुंह में भरना या दिन में तीन-चार बार तीली से लगाना चाहिए।
जात्यादि तेल
नाड़ी व्रण (नासूर), जख्म व फोड़े के जख्म को भरता है। कटने या जलने से पैदा होने वाले घावों के व्रणोपचार के लिए यह उत्तम है। जख्म को साफ करके इस तेल को लगाना या तेल में कपड़ा भिगोकर बांधना फायदेमंद होता है।
गुडुच्यादि तेल
वात रक्त, कुष्ठ रोग, नाड़ी व्रण, विस्फोट, विसर्प व पाद दाहा नामक बीमारियों के लिए यह तेल उपयुक्त है। एग्जिमा या छाजन होने पर इस तेल का प्रयोग बेहद लाभकारी होता है।
काशीसादि तेल
यह तेल नासूर शोधक तथा रोपण है। इसके लगाने से बवासीर के मस्से नष्ट हो जाते हैं साथ ही यह नाड़ी नासूर एवं दूषित नासूर के उपचार हेतु लाभकारी है। बवासीर होने पर दिन में तीन-चार बार संबंधित स्थान पर लगाना अथवा रूई भिगोकर रखना लाभदायक है।
महालाक्षादि तेल
यह तेल सभी प्रकार के ज्वर अर्थात बुखार, विषम ज्वर, जीर्ण ज्वर व तपेदिक का नाश करने में सहायक है। कास, श्वास, प्रतिशाय (जुकाम), हाथ-पैरों की जलन, पसीने की दुर्गंध, शरीर का टूटना, हड्डी के दर्द, पसली के दर्द एवं वात रोगों को यह नष्ट करता है। यह बल, वीर्य कांति बढ़ाकर शरीर को पुष्ट करता है। सुबह व रात्रि को इसककी मालिश करना फायदेमंद है।
पंचगुण तेल
संधिवात एवं शरीर के किसी भी अंग में दर्द होने पर यह तेल उपयोगी है। कर्णशूल होने पर कान में बूंदें डालना लाभदायक होगा। व्रण उपचार में इसका एक फाहा भिगोकर संबंधित स्थान पर बांधे।
षडबिंदु तेल
इस तेल के प्रयोग से गले के ऊपर के रोग जैसे सिर दर्द, सर्दी-जुकाम, नजला, पीनस आदि में लाभ होता है। दिन में दो-तीन बार 5-6 बूंद नाक में डालकर इसे सूंघना चाहिए।

Elimination of harmful bacteria may be transmitted by Panchakarma.

पंचकर्म द्वरा हानिकारक बेक्टीरिया नष्ट किये जा सकते हें|

अमेरिका के होवार्ड विश्वविध्यालय में हुए एक अध्ययन में 73% व्यक्तियों के वजन न घटने का कारण एक हानिकारक बेक्टीरिया को माना गया है|

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