Monthly Archives: February 2016

Indigestion – Q & A

Subject: Indigestion:-Digestive System.
Q-
मुझे अधिकतर अपच की शिकायत रहती है गन्दी डकारें आती हैं, यह समस्या रात को अधिक रहती है; दिन भर पेट फूला रहता है| यह समस्या मौसम बदलने पर बहुत रहती है|  रात का भोजन करने पर पूरी रात बदबूदार डकारें आती हैं|  खाने की इच्छा नहीं होती|  यह समस्या कई सालों से है| – From: neelam <nlmy.joshi@gmail.com>

Benefits of VIRECHNA- A Part of Pancha Karma, [Therepetik Purgation विरेचन]

Benefits of VIRECHNA- A Part of  Pancha Karma, [Therepetik Purgation विरेचन]

डॉ मधु सूदन व्यास

हमारा पेट ही है प्रत्येक रोग का प्रारम्भिक स्थान?

हम जीवित रहने के लिए खाते हें, खाना मनुष्य की स्वभाविक वृत्ति है| जन्मते ही एक सामान्य मनुष्यसबसे पहिले वह यही सीखता है, और जीवन पर्यंत कुछ न कुछ खाता-पीता ही रहता है, और अक्सर इतना की उसे अच्छे-बुरे में भेद भी नहीं करता [सात्विक विशेष व्यक्तियों को छोड़कर] , इस तरह कि मनुष्य पाचन संस्थान किसी अजायबघर की तरह भी माना जा सकता है|

“VAMAN – Part of Pancha Karma” “वमन कर्म” [Therepetik Emisis].

“VAMAN – Part of  Pancha Karma” “वमन कर्म” [Therepetik Emisis]

Dr Madhu Sudan Vyas.

वमन, उबकाई, क़ै [vaman, emesis, spew , vomiting,] अर्थात उल्टी होना बड़ी तकलीफ है, और जब भी यह अचानक और अधिक होती है, तो जीवन संकट में पढ़ सकता है|

पर उल्टी अचानक क्यों होती है?

जब भी हमारे शरीर में, मुहं द्वारा कोई एसी चीज प्रवेश कर जाती है, जो शरीर अच्छा नहीं समझता, तो वह उसे बाहर फेंकने लगता है, यह चीज खाने के रूप में खाई हो, अधिक मात्रा में हो, विषेली हो, अरुचिकर हो, या शरीर को उसका पेट, गले आदि स्थान पर रहना अनुचित लग रहा हो, तो मष्तिष्क उसे बाहर फेंकने के लिए संकेत देता है, इससे उबकाई या उत्क्लेश (spew), या उल्टी की इच्छा होने लगती हें, फिर कुछ देर में मुहं से बाहर भी आने लगता है, यही उल्टी, या वमन होती है|

जब तक वह वस्तु पूरी तरह बाहर नहीं फेंक दी जाती तब तक उल्टी आना रुकती नहीं, पर इसमें भी मष्तिष्क को धोखा भी होता है, एक बार उल्टी हो जाने के बाद भी, कभी कभी मष्तिष्क को इस बात का संकेत नहीं मिल पाता की सारी खराबी निकल चुकी हें, इसलिए स्वत: उल्टी होना नहीं रुकता इससे पानी की कमी होकर जीवन संकट खड़ा हो जाता है|

उल्टी हो जाने पर क्यों अच्छा लगने लगता है?

हम सभी ने महसूस किया होगा की कभी कभी गले में कुछ अटकता सा लगता है, उस समय इच्छा होती है, की उसे बाहर निकल दिया जाये, या उलटी कर दी जाये, इस प्रयत्न में हम अंगुली आदि गले में डालकर निकलने की कोशिश करते हें, तो कुछ चिकना सा पदार्थ या पेट का पित्त [कुछ पीला-नीला सा अंश] जिसमें खाना भी हो सकता है, निकलता है| इसके निकलने से हमको राहत मिलती है, यदि खांसी, श्वास, जैसे रोग हों तो इस उल्टी से आराम भी मिल जाता है, इसका अर्थ है, की हमने वमन या उल्टी के द्वारा अटकते हुए ख़राब पदार्थ को निकालकर चिकित्सा कर ली है|

वमन या उल्टी होना भी रोग ठीक होना या चिकित्सा है|

 वास्तव में यह सच भी है, वास्तव में वमन के द्वारा आधी चिकित्सा तो हो ही गई है, शेष आधी के लिए उस अटकने वाले पदार्थ को दोबारा ज़मने से रोका जाये, और शेष जमा हुई खराबी निकल बाहर फेंक दी जाये| यह काम ओषधियों की सहायता से किया जाता है|

पंचकर्म के अंतर्गत होने वाली प्रक्रिया ही “वमन कर्म” [Therepetik Emisis] है|

इसमें केवल कई एसे रोग आते है, जिनमें वमन द्वारा कफ निकालकर रोगी ठीक किया जा सकता है|

जब कई रोगों में, यह निकाले जाने योग्य ख़राब कफ गले अथवा पेट में नहीं होता, तब सामान्य वमन (उल्टी) से निकलता ही नहीं, एसी स्तिथि में भी पंचकर्म की पूर्व-कर्म स्नेहन-स्वेदन आदि के द्वारा उसे पेट गले या उपरी भाग में लाया जाता है, ताकि वहां से वमन द्वारा निकाला जा सके|

वमन की सारी प्रक्रिया कुशल चिकित्सक के आधीन होने से चिकित्सक के पूर्ण नियंत्रण में होती है-

चिकित्सक स्वयं पूर्व से ही निर्धारित कर लेता है, की कितनी बार, कितनी मात्रा के वमन होने से पूरी सफाई हो जाएगी, उसी के अनुसार वामक ओषधि, आदि व्यवस्था दी जाती है, इस प्रकार से शास्त्रोक्त वमन कर्म से पानी की कमी जैसी समस्या न होने से रोगी रोग मुक्त हो जाता है| यदि कुछ दोष शेष रह जाता है तो, विरेचन आदि से निकाल कर रोगी को पूर्ण लाभ दिया जाता है|

कई रोग वमन से आसानी से ठीक हो जाते हें

एसिडिटी, श्वास, कास, प्रमेह, पांडु रोग (एनीमिया), मुख रोग, आदि कई रोगों में वमन कर्म द्वारा रोगी का रोग जड़ से ठीक किया जा सकता है|

पंचकर्म की इस प्रक्रिया वमन के बाद उदर [पेट] के निचले भाग आंत्र आदि की शेष सफाई शास्त्रोक्त विरेचन द्वारा इसी प्रकार नियंत्रित रूप से बिना कोई कष्ट पहुंचाए, निकालकर रोगी को ठीक किया जा सकता है|

अत: समस्त रोगियों के हित में है यह-

यदि कुशल चिकित्सक निर्देशित करता है, तो बिना किसी भय के करवाकर रोग मुक्त होना चाहिए| इस प्रक्रिया में बहुत अधिक व्यय भी नहीं होता| आयुष सेंटर पर इसकी व्यवस्था कुशल निष्णात चिकित्सको के द्वारा की जा रही है|

निर्भय होकर आचार्य चरक द्वारा वर्णित पंचकर्म द्वारा रोग मुक्त होने हेतु इस आयुष सेंटर पर संपर्क करें

Blood Disengagement is a natural healing.(रक्त मोक्षण है, प्राकृतिक चिकित्सा.)

Blood disengagement is a natural healing.

रक्त मोक्षण है प्राकृतिक चिकित्सा|

अल्टरनेटिव चिकित्सा पद्धतियों में माना जाता है, की रक्त मोक्षण से ख़राब रक्त निकल जाने से लाभ होता है पर यह बात आधुनिक विचार से गले नहीं उतरती, और इन प्रक्रियाओं पर प्रश्न चिन्ह लगता है|

Home Remedies for skin problem

चमकती त्वचा के लिए 10 आसान आयुर्वेदिक नुस्खे (Top 10 Ayurvedic Tips For Glowing Skin)

हमें अपनी त्वचा की देखभाल भी प्राकृतिक तरीके (Natual Skin Care) से ही करना चाहिए क्योंकि प्रकृति में ही छिपा है हमारी सुंदरता का राज। बस हमें इसके असर और इस्तेमाल की जानकारी होनी चाहिए। इसमें न तो कोई साइड इफेक्ट का डर है और न ही किसी रिएक्शन का खतरा।

चेहरे और त्वचा का सौन्दर्य, रंगत और कोमलता बढ़ाना चाहते हैं तो हमें प्राकृतिक सौन्दर्य प्रसाधन का इस्तेमाल इसलिए भी करना चाहिए क्योंकि इससे हमारे चेहरे और त्वचा में कुदरती आभा आएगी और यह सुंदरता टिकाऊ भी होगी।

त्वचा को सबसे ज्यादा नुकसान (Harmful Elements for Skin) सूर्य की अल्ट्रावायलेट किरणों, धूप, प्रदूषण, तनाव, नींद की कमी, ध्रूमपान और शराब के सेवन से होती है।

बाजार में बिकने वाले महंगे सौंदर्य उत्पाद पर यकीन करने की बजाय अगर हम घरेलू और आयुर्वेदिक नुस्खों (Home based Ayurvedic Remedies) को आजमाएं तो त्वचा में निखार और चमक आने के साथ-साथ त्वचा स्वस्थ भी रहेगी।
ग्लोइंग स्किन 10 आयुर्वेदिक नुस्खे (Ayurvedic Tips for Glowing Skin)

1. हल्दी से हटते हैं मुहांसे

हल्दी एक प्राकृतिक एंटीसेप्टिक एंटी-फंगल है। इसके लेप लगाने से त्वचा पर मुहांसे, पिंपल और पिग्मेंटेशन नहीं होते हैं।

2. चंदन से स्किन में आता ग्लो

बाजार में त्वचा की देखभाल के लिए बिकने बनने वाले ज्यादातर कॉस्मेटिक में चंदन का इस्तेमाल होता है। चंदन से त्वचा में निखार आता है। चंदन त्वचा को ठंडक भी पहुंचाता है। इसके इस्तेमाल से त्वचा पर दाने और मुहांसे नहीं होते हैं।

3. एलोवेरा त्वचा की करती सुरक्षा

एलोवेरा एक नेचुरल एंटी क्लिंजर (Natural Skin Cleanser) है। इससे त्वचा चमकदार बनती है। इसमें पाए जाने वाले एंटी इंफ्लेमटरी गुण से त्वचा की बाहरी परत को सुरक्षा मिलती है। इसके इस्तेमाल से स्किन इंफेक्शन (Skin Infection) होने पर होने वाली जलन भी कम होती है।

4. नीम की पत्ती से त्वचा में आती चमक

त्वचा के लिए नीम की पत्ती काफी कारगर होती है। इससे त्वचा में प्राकृतिक निखार आता है। नीम की पत्ती के पाउडर और पिसी हुई गुलाब की पंखुड़ी को नींबू के रस के साथ मिलाकर लगाने से त्वचा में चमक आती है।

 

6. नींबू से मिटती हैं झुर्रियां

चेहरे पर नींबू का रस लगाएं। निचोड़े गए नींबू के छिलके भी चेहरे पर कुछ दिन तक मल सकते हैं। इससे चेहरे की झुर्रियां मिटेंगी। मुंह धोते समय गालों को हथेलियों से थपथपाकर सुखाएं, इससे गालों में रक्त का संचार बढ़ता है और झुर्रियां मिट जाती हैं।

7. डार्क स्पॉट मिटाने के लिए टमाटर है कारगर

चेहरों का डार्क स्पॉट (Dark Spots) मिटाने में टमाटर काफी असरदार है। टमाटर के रस में नींबू का रस, हल्दी पाउडर और बेसन मिलाकर लेप बना लें। इस लेप को गालों पर लगाएं। सूखने के बाद पानी से चेहरे को धो लें। रोज एक बार इसे आजमाएं। डार्क स्पॉट खत्म हो जाएँगे।

8. चुकंदर चेहरे को बनाएगी गुलाबी

चुकंदर का सेवन त्वचा में गुलाबी निखार लाता है। चुकंदर में काफी मात्रा में आइरन होता है, जिससे हीमोग्लोबिन मिलता है। इसे पीस कर चेहरे पर भी लगा सकते हैं। रोजाना इसे आजमाने से चेहरे पर गुलाबी निखार आता है।

9. अंकुरित चना और मूंग खाएं

अंकुरित चना और मूंग सुबह-शाम खाएं। इससे चेहरे की झुर्रियां खत्म होंगी। चना और मूंग में विटामिन ई होता है, जो झुर्रियां मिटाने में कारगर होता है। चना और मूंग नियमित खाने से स्किन में ग्लो आता है।

10. गाजर का रस पीएं

गाजर में एंटी ऑक्सीडेंट पाया जाता है, एक ग्लास गाजर का रस रोज पिएं। इससे त्वचा में निखार आता है, झुर्रियां गायब होती हैं।

Hair fall- Q & A.

dr o p vyas foto

Q– मेरे बाल बहुत झड़ते हें, बाल हल्के हो गए हें ?

{Orijinal Question- bahot hair fall ho rhi h bal halke v ho gue h or oily face ka koi upay v bataiye”Hair Fall बालों का झड़ना- From: Dheeraj kumar <xsonik2u@gmail.com>}

A – बालों का झड़ना कैसे रोके?

बाल झड़ना आम बात है। सामान्यतः दिन में करीब 100 बाल झड़ते हैं तो कोई परेशानी वाली बात नहीं, क्योंकि इतने ही बाल प्रतिदिन झड़ते ही हें | लेकिन अगर आपके बाल इससे कहीं ज्यादा झड़ते हैं तो ये परेशानी की बात है। आज हर किसी को कोई न कोई बालों की समस्या रहती हैं। लेकिन यदि आप अपने आहार में विटामिन बी की मात्रा बढ़ा देंगे तो काफी हद तक आपको इस समस्या से निजात मिल जाएगी। अपने बालों को जरुरत के अनुसार ही आपको अपने बालों को ट्रीटमेंट देना चाहिए। तभी वह प्रभावी ढंग से परिणाम देगा।

Sciatica Treatment – Dr. Ram Arora.

Sciatica treatment – PARIJAT  leaf and the Blood Disengagement (Rakt-Mokshan) have good results.

गृध्रसी में पारिजात पत्र और रक्त मोक्षण के हें अच्छे परिणामdr arora

Sciatica सायटिका

Pain affecting the back, hip, and outer side of the leg, caused by compression of a spinal nerve root in the lower back, often owing to degeneration of an intervertebral disk. The commonest cause of true sciatica is prolapse of intervertebral discs.- Editor.

चलने का नाम ही जीवन है, परंतु कुछ रोग ऐसे हैं, जिसमें रोगी का चलना फिरना दुर्लभ हो जाता है, और वह दूसरों की तरफ सहायता के लिए दयनीय भाव से देखता रहता है। ऐसा ही एक रोग है ”सायटिका”, जिसमें जब मनुष्य को असहनीय दर्द होता है तो वह ईश्वर से मृत्यु तक की प्रार्थना करता है।

परिचय

इस रोग का अधिक परिचय देने की आवश्यकता नहीं, सामान्यत: सभी इस नाम से परिचित रहते हैं। यह कमर से निकलने वाली सायटिका नाड़ी (नर्व) की सूजन अथवा इस पर किसी प्रकार का दबाव पडऩे से यह दर्द उत्पन्न होता है, जो कि कमर से लेकर पुट्टे (Buttock) से होता हुआ टांग के पिछले हिस्से से पैर के अंगूठे तक जाता है तथा इस दर्द के साथ ही प्राय: रोगी को सुन्नता अथवा सुई चुभने जैसी पीड़ा होती है।

यह दोनों टांगों में हो सकती है, परंतु प्राय: एक ही तरफ के रोगी अधिक मिलते हैं। इस विशेष प्रकार के दर्द के कारण सामान्य व्यक्ति भी कह देता है, कि यह सायटिका का दर्द है। इस दर्द से रोगी को न बैठने से राहत मिलती है, न चलने से और न ही लेटने से आराम मिलता है। इसलिए रोगी बैचेन होकर कभी लेटता है, कभी उठता है, कभी चलता है तो कभी बैठता है, परंतु उसे दर्द से राहत नहीं मिलती तथा फिर इस दर्द के डर से रोगी मानसिक तनाव में आने लगता है, जिससे इस तनाव से दर्द और बढ़ जाता है। इस प्रकार रोगी को दर्द के डर से तनाव और तनाव से फिर दर्द, इस प्रकार दोनों ही बढ़ते चले जाते हैं।

ओषधि के साथ रक्त मोक्षण भी है चिकित्सा

दर्द के इसी डर से रोगी चलते समय एक विशेष प्रकार की चाल से चलने लगता है, जो गिद्ध (गृघ्र) की
चाल जैसी होती है, इसलिए आयुर्वेद में इस रोग को ‘गृघ्रसी’ कहा जाता है। आयुर्वेद के अनुसार वात दोष के प्रकोपक विभिन्न प्रकार के आहार-विहार के कारण यह रोग होता है। आयुर्वेद के प्राय: सभी ग्रंथों में इसकी विभिन्न प्रकार की चिकित्सा का वर्णन है, जिसमें विभिन्न प्रकार की औषधियों के साथ ही रक्त मोक्षण का भी उल्लेख मिलता है।

पारिजात पत्र क्वाथ से हुआ 80% लाभ  

चक्र दत्त के ग्रंथ में पारिजात (हारसिंगार) पत्र के क्वाथ का वर्णन किया गयाCARS1 है। इसी उल्लेख के आधार पर हमने पारिजात, जिसे शेफालिका या हारसिंगार भी कहते हैं तथा जिसका वैज्ञानिक नाम Nyctanthes arbortristin है, के पत्रों का क्वाथ बना कर १८ रोगियों को एक माह तक प्रयोग करवाया, जिसके परिणाम निम्न रहे-

१. १८ रोगियों में से अधिकांश की आयु ४० वर्ष से कम थी।

२. महिला तथा पुरुषों में यह सामान्य रूप से पाया गया।

३. गरीब वर्ग के व्यक्तियों में यह रोग कुछ अधिक पाया गया।

४. शहर की तुलना में ग्रामीण क्षेत्र के रोगी कुछ अधिक पाये गये।

५. नौ महिला रोगियों में से सात गृहणियाँ थीं।

६. लगभग ९० (नब्बे) प्रतिशत रोगी हिन्दू पाये गये।

७. रोग के कारण को देखा जाय तो १८ में से ३ रोगियों के गिरने से चोट लगने के बाद, दो रोगियों को भारी वजन उठाने के कारण तथा नौ महिलाओं में से तीन को सामान्य प्रसव के पश्चात भी यह रोग हो गया।

८. एक माह तक पत्तों का क्वाथ पिलाने पर लगभग ८० प्रतिशत रोगियों को विभिन्न लDR Ram Aroraक्षणों में लाभ देखा गया।

रक्त मोक्षण ने दिया प्रभावशाली परिणाम.

इसी प्रकार हमने कई अन्य रोगियों में विभिन्न वात शामक औषधियों के साथ ही रक्त मोक्षण की क्रिया की जो कि शीघ्र प्रभावकारी प्रमाणित हुई। हमने औषधियों के साथ ही कटि वास्ति, नाड़ी स्वेदन, अलावू तथा रक्त मोक्षण आदि प्रक्रियाओं को किया, जिसमें से रक्त मोक्षण की प्रक्रिया से रोगी को शीघ्र परिणाम मिले।

रक्त मोक्षण आयुर्वेद की पंचकर्म चिकित्सा के अंतर्गत होने वाली एक प्रक्रिया है, जो कि जलौंका (लीच), शृंगी, अलावू, घटी यंत्र आदि के द्वारा प्रच्छान्न करके की जाती है। हमने इनका अत्यंत आसान एवं सुलभ परिवर्तित रूप में प्रच्छान कर एक कांच के ग्लास में नकारात्मक दबाव उत्पन्न कर रक्त मोक्षण (खून निकालना) की प्रक्रिया की।

उपरोक्त प्रक्रिया में यदि आप कुछ और जानना चाहे तो सम्पर्क कर सकते हैं।

डॉ. राम अरोरा

एम.डी. (आयुर्वेद) arora.ram15@gmail.com

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